दय्यान खान
पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। यह फैसला नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सामने आया, जिसने राज्य की सियासत को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। भारतीय जनता पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए यह एक अहम राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि बिहार में पहली बार पार्टी अपने दम पर मुख्यमंत्री पद हासिल करने की स्थिति में पहुंची है।
अब तक बिहार में बीजेपी गठबंधन की राजनीति का हिस्सा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद आमतौर पर सहयोगी दलों के पास रहा। ऐसे में सम्राट चौधरी का नाम सामने आना पार्टी की रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि पार्टी अपनी पकड़ को और मजबूत कर सके।
हालांकि, देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां बीजेपी अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना पाई है। इनमें दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के कुछ प्रमुख राज्य शामिल हैं। तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में क्षेत्रीय दलों और वामपंथी पार्टियों का मजबूत प्रभाव रहा है, जिससे बीजेपी को सत्ता में आने का मौका नहीं मिला। वहीं पंजाब में भी पार्टी अब तक बहुमत हासिल करने में सफल नहीं हो सकी है।
इसके अलावा तेलंगाना में हाल के चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर जरूर हुआ है, लेकिन अभी तक वह सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुंच पाई है। पूर्वोत्तर के मिजोरम में भी पार्टी की मौजूदगी सीमित रही है।
बिहार में इस नए राजनीतिक घटनाक्रम को बीजेपी के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अगर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद संभालते हैं, तो यह न सिर्फ राज्य की राजनीति में बदलाव लाएगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी के लिए एक मजबूत संदेश होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इन राज्यों में अपनी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है और क्या वह वहां भी सत्ता तक पहुंचने में कामयाब हो पाती
है।
