तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी K. Annamalai ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देकर राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिससे पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया।

41 वर्षीय अन्नामलाई कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं। 2019 में उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ी और 2020-21 के दौरान भाजपा में शामिल हुए। कम समय में ही वह तमिलनाडु भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे। उनकी "एन मन्न, एन मक्कल" यात्रा और डीएमके सरकार के खिलाफ आक्रामक अभियान ने उन्हें राज्य में अलग पहचान दिलाई।

इस्तीफे के पीछे क्या वजह मानी जा रही है?

हालांकि अन्नामलाई ने औपचारिक रूप से विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी रणनीतिक असहमति बढ़ रही थी।

बताया जा रहा है कि तमिलनाडु में भाजपा और AIADMK के बीच दोबारा गठबंधन होने से अन्नामलाई खुश नहीं थे। वह लंबे समय से राज्य में भाजपा को स्वतंत्र ताकत के रूप में स्थापित करने की वकालत कर रहे थे। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उनकी भूमिका सीमित होने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में रही।

दिल्ली में आखिरी दौर की बातचीत

इस्तीफे से पहले अन्नामलाई दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार इन बैठकों में उन्होंने अपनी नाराजगी और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की थी। इसके बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।

क्या नई पार्टी बनाने जा रहे हैं अन्नामलाई?

यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अन्नामलाई जल्द एक नए राजनीतिक आंदोलन या संगठन की शुरुआत कर सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे "तमिल-फर्स्ट" और राष्ट्रवादी सोच वाला मंच बताया गया है, जो भविष्य में राजनीतिक दल का रूप भी ले सकता है।

इस्तीफे के बाद अन्नामलाई ने एक नए राजनीतिक सफर की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि उनका उद्देश्य व्यक्तिवादी और वंशवादी राजनीति को चुनौती देना है तथा तमिलनाडु के लिए एक नया विकल्प तैयार करना है।

BJP के लिए कितना बड़ा झटका?

तमिलनाडु में भाजपा का जनाधार बढ़ाने का श्रेय काफी हद तक अन्नामलाई को दिया जाता है। उनके नेतृत्व में पार्टी का वोट शेयर पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा था। ऐसे में उनका जाना भाजपा के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौती माना जा रहा है। हालांकि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष Nainar Nagendran ने कहा है कि पार्टी को इससे कोई नुकसान नहीं होगा।

अब सभी की नजर अन्नामलाई की अगली घोषणा पर है। यदि वह नई पार्टी या आंदोलन का औपचारिक ऐलान करते हैं, तो 2026 के बाद तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके, एआईएडीएमके, भाजपा और अन्य दलों के समीकरण बदल सकते हैं। दक्षिण भारत की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले महीनों का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम साबित हो सकता है।