हममें से ज्यादातर लोगों को बचपन से यह बताया जाता रहा है कि स्वस्थ रहने के लिए रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास यानी 2 से 3 लीटर पानी पीना जरूरी है। कई लोग तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाकर हर घंटे पानी पीते हैं, चाहे उन्हें प्यास लगी हो या नहीं। कुछ लोगों का मानना है कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, शरीर उतना ही स्वस्थ रहेगा।

हालांकि, वैज्ञानिकों और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस धारणा पर सवाल उठाए हैं। कई शोध बताते हैं कि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग-अलग होती है और एक निश्चित मात्रा सभी पर लागू नहीं की जा सकती।

विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर खुद संकेत देता है कि उसे कब पानी चाहिए। यानी जब प्यास लगे, तब पानी पीना शरीर की सबसे स्वाभाविक और सुरक्षित जरूरत मानी जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पानी पीने की मात्रा को लेकर सबसे बड़ा मिथक क्या है और इसे पीने का सही तरीका क्या है।

शरीर के लिए पानी क्यों जरूरी है?

मानव शरीर का लगभग 50 से 65 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। शरीर की हर कोशिका, ऊतक और अंग को सही तरीके से काम करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है।

पानी शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है, जैसे

शरीर का तापमान नियंत्रित रखना

पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाना

पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना

पेशाब और पसीने के जरिए विषैले तत्वों को बाहर निकालना

जोड़ों को चिकनाई प्रदान करना

दिमाग को बेहतर ढंग से काम करने में मदद करना

ऊर्जा स्तर बनाए रखना

इसी कारण शरीर में पानी की कमी होने पर उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।

पानी की मात्रा को लेकर सबसे बड़ा मिथक क्या है?

सबसे बड़ा मिथक यह माना जाता है कि हर व्यक्ति को रोजाना 8 गिलास या 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए, चाहे उसे प्यास लगे या नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की जरूरत व्यक्ति की उम्र, वजन, मौसम, शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।

ऑस्ट्रेलिया में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि जब शरीर को पर्याप्त पानी मिल जाता है, तो दिमाग ज्यादा पानी पीने से रोकने के लिए निगलने की प्रक्रिया को कठिन बना देता है।

इस अध्ययन में लोगों को दो अलग-अलग परिस्थितियों में पानी पिलाया गया। पहली बार एक्सरसाइज के तुरंत बाद, जब उन्हें प्यास लगी थी, और दूसरी बार तब, जब उन्हें प्यास नहीं थी। शोध में पाया गया कि बिना प्यास के पानी निगलना लगभग तीन गुना ज्यादा मुश्किल था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह शरीर का प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र है, जो जरूरत से ज्यादा पानी पीने से बचाता है।

पानी पीने का सही तरीका क्या है?

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्यास लगना शरीर का प्राकृतिक अलार्म सिस्टम है। जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तो दिमाग प्यास का संकेत देता है। इसलिए अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए प्यास लगने पर पानी पीना सही माना जाता है।

हालांकि कुछ परिस्थितियों में केवल प्यास पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता, जैसे

बुजुर्गों में

छोटे बच्चों में

गंभीर बीमारी के दौरान

अत्यधिक गर्म मौसम में

वर्कआउट या भारी शारीरिक गतिविधि के समय

इन स्थितियों में शरीर को अतिरिक्त पानी की आवश्यकता हो सकती है।

क्या ज्यादा पानी पीना नुकसानदायक हो सकता है?

कई लोग मानते हैं कि ज्यादा पानी पीने का कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।

जरूरत से ज्यादा पानी पीने पर शरीर में सोडियम का स्तर बहुत कम हो सकता है। इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया (Hyponatremia) कहा जाता है।

इसके कारण:

सिरदर्द

उल्टी

कमजोरी

चक्कर आना

दौरे पड़ना

जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।