बदलती लाइफस्टाइल के चलते हार्ट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आमतौर पर लोग एलडीएल, एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को देखकर दिल की सेहत का अंदाजा लगाते हैं। अधिकांश लोगों का मानना है कि यदि उनकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट सामान्य है, तो उन्हें हार्ट अटैक का खतरा नहीं है। लेकिन हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट होने के बावजूद कम उम्र में लोगों को हार्ट अटैक आया है।
इसी वजह से अब डॉक्टर केवल पारंपरिक कोलेस्ट्रॉल मार्कर्स पर ही निर्भर नहीं रह रहे हैं, बल्कि ऐसे छिपे हुए जोखिमों की भी जांच करने की सलाह दे रहे हैं जो सामान्य टेस्ट में नजर नहीं आते। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर के भीतर मौजूद कुछ समस्याएं रिपोर्ट में दिखाई नहीं देतीं, लेकिन दिल की सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।
क्या है Lp(a), जिसे माना जा रहा है छिपा हुआ खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, Lipoprotein(a) या Lp(a) एक विशेष प्रकार का कोलेस्ट्रॉल कण होता है। यह देखने में LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल जैसा होता है, लेकिन इसमें एक अतिरिक्त प्रोटीन जुड़ा होता है। यही कारण है कि यह रक्त नलिकाओं में चर्बी जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सामान्य लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में Lp(a) की जांच नहीं की जाती। ऐसे में किसी व्यक्ति की कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट सामान्य आ सकती है, लेकिन उसके दिल को खतरा बना रह सकता है।
बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले
भारत में डॉक्टरों को एक चिंताजनक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। कई ऐसे लोग, जिनकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट सामान्य होती है, 30 से 40 वर्ष की उम्र में भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, इसके पीछे जेनेटिक कारणों से बढ़ा हुआ Lp(a) लेवल एक महत्वपूर्ण वजह हो सकता है। यह फैक्टर मुख्य रूप से आनुवंशिक होता है, इसलिए डाइट और एक्सरसाइज का इस पर सीमित प्रभाव पड़ता है।
भारत में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में समय से पहले होने वाली हृदय संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में होने वाली कुल मौतों का बड़ा हिस्सा हृदय रोगों से जुड़ा है।
चिंता की बात यह है कि कई मरीजों में हार्ट अटैक पश्चिमी देशों की तुलना में 10 से 15 वर्ष पहले हो रहा है। जेनेटिक प्रवृत्ति, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अनएक्टिव लाइफस्टाइल और Lp(a) जैसे छिपे हुए लिपिड मार्कर इस जोखिम को और बढ़ा सकते हैं।
किन लोगों को करवाना चाहिए Lp(a) टेस्ट?
डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हृदय रोग के मामले रहे हों, उन्हें कम से कम एक बार Lp(a) टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और खराब लाइफस्टाइल वाले लोगों को भी दिल की जांच को गंभीरता से लेना चाहिए। हालांकि Lp(a) को सीधे कम करना आसान नहीं माना जाता, लेकिन इसकी जानकारी होने पर LDL कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसे अन्य जोखिम कारकों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
