जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में कई बार लोगों के स्मार्टफोन पर अचानक पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क का नाम दिखाई देने लगता है। कभी फोन रोमिंग का संकेत देता है, तो कभी विदेशी नेटवर्क स्क्रीन पर नजर आने लगता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या फोन वास्तव में पाकिस्तान के नेटवर्क से जुड़ गया है? हालांकि, इसके पीछे कोई हैकिंग या तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि मोबाइल नेटवर्क और रेडियो सिग्नलों से जुड़ा एक दिलचस्प वैज्ञानिक कारण है। आखिर सीमा के इस पार बैठे लोगों के फोन तक पाकिस्तान के सिग्नल कैसे पहुंच जाते हैं, आइए समझते हैं।
सीमा के उस पार के सिग्नल भारत तक कैसे पहुंचते हैं?
मोबाइल नेटवर्क टावरों से निकलने वाली रेडियो तरंगों के जरिए काम करता है। ये तरंगें हवा में फैलती हैं और फोन तक सिग्नल पहुंचाती हैं। चूंकि रेडियो तरंगें किसी देश की सीमा को नहीं पहचानतीं, इसलिए सीमा के पास मौजूद पाकिस्तानी टावरों के सिग्नल कई बार भारतीय क्षेत्र में भी पहुंच जाते हैं। खासकर पहाड़ी इलाकों या उन जगहों पर जहां भारतीय नेटवर्क कमजोर होता है, वहां विदेशी सिग्नल फोन तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
फोन को कैसे पता चलता है कि आसपास कौन-कौन से नेटवर्क मौजूद हैं?
स्मार्टफोन लगातार अपने आसपास उपलब्ध नेटवर्क की तलाश करता रहता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटिक होती है। जब फोन को किसी दूसरे देश के नेटवर्क का सिग्नल मिलता है, तो वह उसे अपनी सूची में दिखा सकता है। इसी वजह से कई बार स्क्रीन पर पाकिस्तानी नेटवर्क का नाम नजर आने लगता है। यह केवल नेटवर्क की उपलब्धता दिखाता है, कनेक्शन होने की पुष्टि नहीं करता।
क्या केवल नेटवर्क दिखने से फोन उस पर चलने लगता है?
इसका जवाब है- नहीं। किसी नेटवर्क का नाम दिखाई देना और उस नेटवर्क से सेवाएं मिलना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। कॉल, मैसेज या इंटरनेट चलाने के लिए सिम कार्ड को उस नेटवर्क पर अधिकृत रूप से रजिस्टर होना पड़ता है। यदि सिम में इंटरनेशनल रोमिंग सक्रिय नहीं है, तो फोन विदेशी नेटवर्क को पहचानने के बावजूद उससे कनेक्ट नहीं हो सकेगा।
रोमिंग चालू हो तो क्या हो सकता है?
अगर किसी यूजर के नंबर पर अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा सक्रिय है, तो कुछ परिस्थितियों में फोन विदेशी नेटवर्क से जुड़ सकता है। ऐसे में कॉलिंग, मैसेज और डेटा सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। हालांकि इसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है और यह पूरी तरह नेटवर्क ऑपरेटर की नीतियों पर निर्भर करता है।
सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम है यह मामला?
सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी नेटवर्क की मौजूदगी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से लेती हैं। इसी कारण सीमा के पास भारतीय मोबाइल नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए लगातार नए टावर लगाए जाते हैं और कवरेज बेहतर की जाती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोगों के फोन प्राथमिक रूप से भारतीय नेटवर्क से ही जुड़े रहें।
जम्मू-कश्मीर या अन्य सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी नेटवर्क का नाम दिखाई देना कोई असामान्य बात नहीं है। यह रेडियो सिग्नलों की प्राकृतिक पहुंच का परिणाम है। हालांकि, केवल नेटवर्क दिखने भर से फोन पाकिस्तान के नेटवर्क पर काम करने नहीं लगता। इसके लिए रोमिंग और नेटवर्क अनुमति जैसी कई तकनीकी शर्तें पूरी होना जरूरी हैं।
