भीषण गर्मी, लू और तपते आसमान से जूझ रहे देशवासियों के लिए आखिरकार राहत की खबर आ गई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अब तेजी पकड़ ली है और देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। केरल के तट से प्रवेश करने के बाद मानसून पिछले कुछ दिनों में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले एक सप्ताह के दौरान मानसून और तेज़ी से आगे बढ़ेगा, जिससे कई राज्यों में झमाझम बारिश देखने को मिलेगी। हालांकि, जहां बारिश किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं कई क्षेत्रों में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की आशंका भी बढ़ गई है। ऐसे में मानसून की यह दस्तक राहत और चुनौती दोनों साथ लेकर आई है।
दक्षिण भारत में बरस रहा आसमान, कई जिलों में रेड अलर्ट
इस समय मानसून का सबसे ज्यादा असर दक्षिण भारत में दिखाई दे रहा है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। केरल में हालात सबसे ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं। भारतीय मौसम विभाग ने मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड समेत कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी मंडरा रहा है। प्रशासन ने पर्यटक स्थलों पर आवाजाही सीमित कर दी है और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। कर्नाटक और तमिलनाडु के कई जिलों में भी तेज हवाओं के साथ लगातार बारिश हो रही है, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
पूर्वोत्तर भारत में मानसून का जोर, नदियां उफान पर
मानसून ने पूर्वोत्तर भारत में भी पूरी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, असम और मेघालय में लगातार बारिश हो रही है। कई जिलों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में बारिश और तेज हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि किसानों के लिए यह बारिश बेहद फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई का समय शुरू हो चुका है और खेतों को पर्याप्त नमी मिलने लगी है।
दिल्ली-एनसीआर को राहत, लेकिन अभी इंतजार बाकी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में मानसून अभी आधिकारिक रूप से नहीं पहुंचा है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। पिछले कुछ दिनों में चली तेज हवाओं, बादलों और हल्की बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। जहां कुछ दिन पहले पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा था, वहीं अब अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मानसून की वर्तमान रफ्तार बनी रही तो जून के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में मानसून दस्तक दे सकता है।
राजस्थान में राहत के बाद फिर बढ़ेगी गर्मी
राजस्थान में फिलहाल प्री-मानसून बारिश और आंधी के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली हुई है। जयपुर, दौसा, करौली, नागौर और डूंगरपुर जैसे कई शहरों में तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है। लेकिन मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 8 जून के बाद पश्चिमी राजस्थान में एक बार फिर लू का दौर लौट सकता है। फलोदी और जैसलमेर जैसे इलाकों में तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना है। हालांकि पूर्वी राजस्थान में छिटपुट बारिश और आंधी का दौर जारी रह सकता है, जिससे कुछ इलाकों में गर्मी से राहत बनी रहेगी।
किस राज्यों में कब पहुंचेगा मानसून?
मौसम विभाग के अनुसार मानसून अब महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मिजोरम और मणिपुर के बड़े हिस्सों को कवर कर चुका है। अगले कुछ दिनों में इसके तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। इसके बाद मानसून उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा। अनुमान है कि जून के मध्य तक बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून पहुंच जाएगा। वहीं जून के तीसरे सप्ताह तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मानसून की बारिश शुरू हो सकती है। अगर मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस बार मानसून पूरे देश को सामान्य समय सीमा के भीतर कवर कर सकता है।
खेती-किसानी के लिए क्यों अहम है यह मानसून?
भारत की करीब आधी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है और देश की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर टिका हुआ है। खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों की बुवाई मानसून के पानी पर निर्भर करती है। यही वजह है कि किसानों की नजरें हर साल मानसून की चाल पर टिकी रहती हैं। इस बार मौसम विभाग ने सामान्य से बेहतर मानसून की संभावना जताई है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अच्छी बारिश जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर को भी बेहतर बनाएगी, जिसका फायदा पूरे साल देश को मिलेगा।
राहत के साथ सतर्कता भी जरूरी
मानसून जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं कई बार बड़ी मुश्किलें भी खड़ी कर देता है। भारी बारिश वाले इलाकों में बाढ़, भूस्खलन, पेड़ गिरने, बिजली बाधित होने और सड़क संपर्क टूटने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, कमजोर ढांचों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार और प्रभाव दोनों बढ़ने वाले हैं, ऐसे में राहत के साथ सावधानी भी उतनी ही जरूरी होगी। फिलहाल देशभर में लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं, क्योंकि मानसून की हर नई दस्तक गर्मी से राहत और बेहतर मौसम की उम्मीद लेकर आ रही है।
