बिहार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी Y+ श्रेणी की सुरक्षा वापस लौटा दी है। इस कदम को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से सरकार के खिलाफ विरोध के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सुरक्षा में बदलाव राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है, जबकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा संबंधी फैसले तय मानकों और समीक्षा के आधार पर लिए जाते हैं।
क्या है पूरा मामला?
बिहार सरकार ने हाल ही में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया था। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इसके बाद RJD ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया। इसी विवाद के बीच तेजस्वी यादव ने भी अपनी Y+ सुरक्षा टीम वापस लौटा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में तैनात उनकी सुरक्षा टीम को वापस भेज दिया गया। RJD नेताओं का कहना है कि यह सरकार के फैसले के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध है।
RJD ने क्या कहा?
RJD नेताओं ने आरोप लगाया है कि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में बदलाव कर सरकार राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे "सिक्योरिटी बॉयकॉट पॉलिटिक्स" बताया और कहा कि विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।वहीं लालू परिवार की ओर से भी लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। रोहिणी आचार्य ने सुरक्षा में कटौती को बदले की राजनीति बताया और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सरकार का क्या पक्ष है?
सरकार की ओर से पहले जारी आदेश में कहा गया था कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा राज्य सुरक्षा समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा प्रदान करने या उसमें बदलाव करने का निर्णय खतरे के आकलन और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार लिया जाता है
क्यों अहम है यह विवाद?
बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा का मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। एक तरफ RJD इसे विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी तरफ NDA सरकार इसे प्रशासनिक फैसला बता रही है। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।
