हैदराबाद: Hyderabad में अब शराब पीकर गाड़ी चलाना (ड्रंक ड्राइविंग) आसान नहीं रहा। ट्रैफिक पुलिस ने इस तरह के मामलों पर सख्ती बढ़ा दी है। अब कार्रवाई सिर्फ चालान काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सड़क पर जांच, कोर्ट में केस, काउंसलिंग और गंभीर मामलों में जेल तक की सजा शामिल है।
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, अगर किसी ड्राइवर के खून में अल्कोहल की मात्रा तय सीमा (30 mg/100 ml) से ज्यादा पाई जाती है, तो उसके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाता है। पुलिस का पहला मकसद सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। अगर कोई व्यक्ति शराब के नशे में पकड़ा जाता है, तो उसे खुद गाड़ी चलाने नहीं दिया जाता। पुलिस उसके परिवार या किसी रिश्तेदार को बुलाकर उसे सुरक्षित घर भेजती है।
हालांकि, इस अभियान में पुलिस को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। कई बार ड्राइवर के पास गाड़ी के जरूरी दस्तावेज नहीं होते या वह गाड़ी का मालिक ही नहीं होता। कुछ लोग पुलिस से बहस भी करते हैं और कहते हैं कि वे सुरक्षित घर पहुंच सकते थे या यह उनका निजी मामला है। इसके बावजूद पुलिस सख्ती से नियमों का पालन करा रही है।
पुलिस ने साफ किया है कि अब यह जांच सिर्फ वीकेंड तक सीमित नहीं है। शहर में किसी भी दिन और किसी भी समय अचानक चेकिंग की जा सकती है। पुलिस अपनी लोकेशन भी बदलती रहती है ताकि सोशल मीडिया या व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए चेकिंग की जानकारी पहले से न मिल सके।
इस अभियान का एक अहम हिस्सा बार-बार नियम तोड़ने वालों की पहचान करना है। पुलिस के पास ऐसा सिस्टम है जिससे तुरंत पता चल जाता है कि कोई व्यक्ति पहले भी इस तरह के अपराध कर चुका है या नहीं। केस दर्ज होने के बाद चार्जशीट तैयार की जाती है और मामला कोर्ट में पेश किया जाता है, जहां सजा तय होती है।
सिर्फ सजा ही नहीं, बल्कि सुधार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस काउंसलिंग की व्यवस्था भी कर रही है, जिसमें सिर्फ ड्राइवर ही नहीं बल्कि उसके परिवार को भी बुलाया जाता है। उन्हें शराब पीकर गाड़ी चलाने के खतरों, कानूनी परिणामों और मानसिक प्रभाव के बारे में बताया जाता है।
साक्ष्य के तौर पर पुलिस डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। ब्रेथ एनालाइज़र से शराब की मात्रा मापी जाती है और उसका प्रिंटआउट ड्राइवर को दिया जाता है। साथ ही समय के साथ फोटो भी ली जाती है, जिसे कोर्ट में सबूत के रूप में पेश किया जाता है।
पुलिस का कहना है कि उनका मकसद लोगों को शराब पीने से रोकना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से व्यवहार करने के लिए प्रेरित करना है। अधिकारी सलाह देते हैं कि अगर कोई शराब पीता है, तो वह कैब, बाइक टैक्सी या किसी ऐसे दोस्त की मदद ले जो शराब न पी रहा हो।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जिन लोगों के शरीर में शराब की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है, उन्हें कोर्ट में पेश होना अनिवार्य होगा और उन्हें जेल भी हो सकती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि एक छोटी सी गलती भी बड़ी और खतरनाक घटना का कारण बन
सकती है।
