शादी और परिवार को लेकर भारतीय समाज में हमेशा से कुछ तय मान्यताएं और नियम रहे हैं। जब भी कोई व्यक्ति इन परंपरागत नियमों से हटकर अपनी जिंदगी के फैसले लेने की कोशिश करता है, तो समाज उसे अक्सर रूढ़ियों और पुराने नजरिए से देखने लगता है। हालांकि मनोरंजन जगत की कुछ ऐसी साहसी और मजबूत महिलाएं भी रही हैं, जिन्होंने इन सामाजिक बंधनों को चुनौती देते हुए मातृत्व का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने बिन ब्याही मां बनने को लेकर समाज के ताने, आलोचनाएं और जजमेंट झेले, लेकिन कभी अपने फैसलों से पीछे नहीं हटीं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बच्चों को बेहतरीन परवरिश देकर यह साबित किया कि मातृत्व किसी सामाजिक प्रमाणपत्र का मोहताज नहीं होता। आइए जानते हैं बॉलीवुड की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों के बारे में, जिन्होंने बिना शादी किए मां बनने का फैसला किया और ‘लव चाइल्ड’ को लेकर समाज की सोच बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नीना गुप्ता
जब भी बॉलीवुड में सिंगल मदरहुड या समाज की परंपरागत सोच के खिलाफ जाकर कोई बड़ा फैसला लेने की बात होती है, तो सबसे पहले अभिनेत्री नीना गुप्ता का नाम सामने आता है। 80 के दशक में, जब लिव-इन रिलेशनशिप या शादी से पहले प्रेग्नेंसी के बारे में सोचना भी समाज की नजर में गलत माना जाता था, तब नीना गुप्ता ने वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ अपने रिश्ते को खुले तौर पर स्वीकार किया।
नीना गुप्ता ने बिना शादी किए अपनी बेटी मसाबा गुप्ता को जन्म दिया। उस दौर में उन्हें समाज की कड़ी आलोचनाओं, तानों और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी बेटी की परवरिश पूरी जिम्मेदारी के साथ की। आज मसाबा गुप्ता देश की सबसे सफल और चर्चित फैशन डिजाइनरों में गिनी जाती हैं। नीना गुप्ता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि एक अकेली मां भी अपने बच्चे को हर खुशी और बेहतर भविष्य दे सकती है।
कल्कि कोचलिन
आधुनिक दौर में अभिनेत्री कल्कि कोचलिन ने भी समाज की बनी-बनाई परंपराओं से अलग रास्ता चुनने का साहस दिखाया। साल 2019 में जब कल्कि ने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा की, तो यह खबर काफी चर्चा में रही। उस समय वह अपने बॉयफ्रेंड गाय हर्शबर्ग के साथ रिश्ते में थीं और उन्होंने बिना शादी किए मां बनने का फैसला किया था।
कल्कि ने अपनी बेटी सैफो को जन्म दिया। इस फैसले के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हमेशा बेबाकी और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखी। कल्कि का कहना था कि मातृत्व का अनुभव करने के लिए केवल शादी का प्रमाणपत्र जरूरी नहीं होता। उन्होंने अपनी पूरी प्रेग्नेंसी और पैरेंटिंग जर्नी को खुलकर लोगों के साथ साझा किया और समाज को यह संदेश दिया कि मां बनने का फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत होता है।
एमी जैक्सन
फिल्म 2.0 और सिंह इज़ ब्लिंग से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री एमी जैक्सन ने भी ‘लव चाइल्ड’ को लेकर समाज की सोच बदलने में अहम भूमिका निभाई। साल 2019 में एमी ने अपने मंगेतर जॉर्ज पानायिटू के साथ सगाई की थी और शादी से पहले ही अपने बेटे एंड्रियास को जन्म दिया।
एमी ने अपनी प्रेग्नेंसी को छिपाने की बजाय उसका खुलकर जश्न मनाया। उन्होंने अपने खूबसूरत मैटरनिटी फोटोशूट्स के जरिए यह दिखाया कि मां बनना किसी भी महिला के जीवन का एक खूबसूरत अनुभव होता है और इसे सामाजिक दबाव के कारण छिपाने की जरूरत नहीं है। एमी का यह कदम कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बना।
माही गिल
फिल्म देव डी और साहेब, बीवी और गैंगस्टर जैसी फिल्मों में अपनी शानदार अदाकारी से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री माही गिल ने भी अपनी निजी जिंदगी को लेकर समाज की परवाह नहीं की। माही ने लंबे समय तक अपनी बेटी वेरोनिका के बारे में सार्वजनिक रूप से बात नहीं की थी।
साल 2019 में उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया कि वह बिना शादी किए एक बेटी की मां हैं। माही अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थीं और उसी दौरान उन्होंने अपनी बेटी को जन्म दिया था।
जब उनसे शादी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। माही ने कहा था, मुझे शादी करने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन बिना शादी के भी कोई मां बन सकता है। मुझे अपनी बिन ब्याही मां वाली पहचान से कोई दिक्कत या शर्मिंदगी नहीं है। शादी एक खूबसूरत संस्था है, लेकिन यह किसी महिला के मां बनने या न बनने का अधिकार तय नहीं करती।
सुष्मिता सेन
हालांकि सुष्मिता सेन ने जैविक रूप से बच्चों को जन्म नहीं दिया, लेकिन जब बात बिना शादी किए मां बनने और गोद लिए गए बच्चों को अपना मानने की आती है, तो उनका नाम सबसे प्रेरणादायक उदाहरणों में शामिल होता है।
साल 2000 में, जब सुष्मिता सेन महज 24 साल की थीं और उनका करियर सफलता के शिखर पर था, तब उन्होंने अपनी पहली बेटी रेनी को गोद लिया। उस समय उन्होंने शादी भी नहीं की थी। उस दौर में एक अविवाहित महिला के लिए बच्चा गोद लेना कानूनी और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर बेहद कठिन माना जाता था।
समाज ने उन पर कई सवाल उठाए। लोगों ने पूछा कि बिना शादी के वह बच्चे को पिता का नाम कैसे देंगी, लेकिन सुष्मिता सेन हर चुनौती का डटकर सामना करती रहीं। उन्होंने कानूनी लड़ाई भी लड़ी और अपने फैसले पर अडिग रहीं।
इसके बाद साल 2010 में उन्होंने अपनी दूसरी बेटी अलीशा को भी गोद लिया। सुष्मिता ने दुनिया को यह दिखाया कि मां बनने के लिए न तो शादी जरूरी है और न ही किसी बच्चे को जन्म देना। इसके लिए सिर्फ एक बड़ा दिल और बेइंतहा प्यार की जरूरत होती है।
मातृत्व की कोई शर्त नहीं होती
इन अभिनेत्रियों ने सिर्फ समाज की पुरानी और दकियानूसी सोच को चुनौती ही नहीं दी, बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिलाओं को भी यह हौसला दिया कि वे अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले सकती हैं। शादी करना या न करना किसी व्यक्ति का निजी निर्णय हो सकता है, लेकिन एक बच्चे को प्यार देना, उसकी देखभाल करना और उसे अच्छी परवरिश देना ही मातृत्व का असली अर्थ है।
नीना गुप्ता से लेकर कल्कि कोचलिन, एमी जैक्सन, माही गिल और सुष्मिता सेन तक, इन सभी महिलाओं ने अपने साहस, आत्मविश्वास और फैसलों के जरिए यह साबित किया है कि किसी बच्चे को ‘लव चाइल्ड’ कहना कोई अभिशाप नहीं है। बल्कि यह प्यार, जिम्मेदारी और हिम्मत की एक खूबसूरत पहचान हो सकती है। इन महिलाओं की कहानियां आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो समाज के डर से अपने फैसले लेने से हिचकिचाते हैं।
