मुस्लिमाबाद जिले की भगवांगोला क्षेत्र की रहने वाली सीपीआई(एम) कार्यकर्ता मोस्तारी बानू का कहना है कि बंगाल में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई राहत उनकी याचिका के आधार पर हुई, न कि सिर्फ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर।


मोस्तारी बानू एक साधारण परिवार से आने वाली महिला हैं। उनका क्षेत्र बंगाल में विशेष पुनरीक्षा (SIR) के दौरान सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक है।

सिर्फ उनके विधानसभा क्षेत्र में ही 47 हजार से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए।

पूरे जिले में यह संख्या 4.5 लाख से भी ज़्यादा है


मोस्तारी बानू ने 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसमें उन्होंने SIR प्रक्रिया की खामियों,मजदूरों को पेशियों में पहुंचने में आई मुश्किलों,और गलत तरीके से हटाए गए नामों पर सवाल खड़े किए।उनकी याचिका के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी पहचान की जांच ट्रिब्यूनल फिर से करे

जिनकी अपीलें स्वीकार की जा चुकी हैं, उन्हें आने वाले चुनाव में वोट डालने दिया जाए

यह आदेश 16 अप्रैल 2026 को आया।


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी याचिका पर आया है।

इस पर मोस्तारी बानू ने तीखा सवाल उठाया:

कोर्ट के हर आदेश में मेरा नाम लिखा है मोस्तारी बानू बनाम चुनाव आयोग। क्या मुख्यमंत्री किसी भी आदेश में अपना नाम दिखा सकती हैं?उनका कहना है कि

मुख्यमंत्री 4 फरवरी को केस में शामिल हुईं

तब तक ज़्यादातर सुनवाई पूरी हो चुकी थी

मीडिया ने मुख्यमंत्री पर ज़्यादा रोशनी डाली, जबकि असली लड़ाई उन्होंने लड़ी थी

उनके वकील का भी कहना है कि मीडिया ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी को मुद्दा बना दिया, जबकि शुरुआत और मुख्य संघर्ष बानू ने किया।


सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि बानू ने उन लोगों के लिए आवाज उठाई जिनकी सुनवाई कोई नहीं कर रहा था।

उनके पति कमाल हुसैन, जो राज्य प्रवासी मजदूर संघ के जिला सचिव हैं, बताते हैं कि संसाधन सीमित होने के कारण बानू रोज़ अदालत नहीं जा पाती थीं, लेकिन लोगों ने चंदा इकट्ठा करके उनकी मदद की।


SIR प्रक्रिया के बाद पूरे बंगाल में 27 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए राज्य में सिर्फ 19 ट्रिब्यूनल हैं चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होने हैं

ऐसे में सभी योग्य मतदाताओं को अंतिम सूची में वापस शामिल करना बड़ी चुनौती है अंतिम अतिरिक्त सूची 21 और 27 अप्रैल को जारी होगी


मोस्तारी बानू का कहना है कि उन्होंने अकेले यह लड़ाई शुरू की और सुप्रीम कोर्ट की राहत उनकी पहल के आधार पर मिली।अब राजनीतिक श्रेय को लेकर विवाद खड़ा हो गया है बानू के समर्थकों का कहना है कि उनकी भूमिका को पीछे धकेलकर मुख्यमंत्री की भूमिका को ज्यादा दिखाया जा रहा है।