पटना के कदमकुआं इलाके को बिहार की कोचिंग राजधानी माना जाता है, जहां हर साल लाखों छात्र सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहुंचते हैं। इसी कोचिंग हब में पिछले कुछ वर्षों में दो बड़े नाम तेजी से उभरे-खान ग्लोबल स्टडीज के संस्थापक फैजल खान उर्फ खान सर और ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के संचालक रौशन आनंद। दोनों संस्थानों के बीच छात्रों की संख्या, लोकप्रियता और प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा पहले से मौजूद थी, लेकिन जून 2026 में यह प्रतिस्पर्धा खुले टकराव में बदल गई। आज स्थिति यह है कि मामला पुलिस जांच, फायरिंग, गिरफ्तारी, कोर्ट, छात्र आंदोलन और हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। ताजा घटनाक्रम में खान सर एफआईआर रद्द कराने के लिए पटना हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज होने के बाद विवाद और गहरा गया है।

बैनर विवाद से शुरू हुई कहानी, 2 जून की रात फायरिंग ने बदल दिया पूरा खेल

जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत कथित तौर पर एक प्रचार बैनर फाड़े जाने की घटना से हुई थी। ज्ञान बिंदु कोचिंग की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके संस्थान से जुड़ी प्रचार सामग्री को नुकसान पहुंचाया गया, जिसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ने लगा। सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और वीडियो वार शुरू हो गया। हालात तब बिगड़ गए जब 2 जून की रात खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर फायरिंग की घटना सामने आई। शुरुआती दौर में इसे खान सर के संस्थान को डराने और निशाना बनाने की कोशिश बताया गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को हिरासत में लिया और मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। उस समय ऐसा लग रहा था कि जांच का केंद्र प्रतिद्वंद्वी पक्ष रहेगा, लेकिन बाद में सामने आए सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।

जांच में आया बड़ा ट्विस्ट: अपने ही गार्डों पर फायरिंग का आरोप, खान सर पर भी दर्ज हुआ केस

पुलिस जांच के दौरान कई सीसीटीवी फुटेज और वीडियो खंगाले गए। जांच एजेंसियों के अनुसार, जिन लोगों को हवाई फायरिंग करते देखा गया, वे खान सर के निजी सुरक्षा गार्ड निकले। इसके बाद पुलिस ने दोनों गार्डों को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान सामने आए बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर खान सर का नाम भी केस में जोड़ा गया। यही वह मोड़ था जिसने पूरे विवाद को शिक्षा जगत की प्रतिस्पर्धा से निकालकर आपराधिक जांच के दायरे में पहुंचा दिया। गिरफ्तारी की आशंका बढ़ने के बाद खान सर सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए और उनके ठिकाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि बाद में उन्होंने अदालत का रुख किया और उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल गई। अब उनकी कानूनी टीम एफआईआर को ही रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है।

रौशन आनंद जेल में, छात्रों का आक्रोश सड़कों पर; दोनों पक्षों के समर्थन में खड़ा हुआ बड़ा छात्र वर्ग

दूसरी ओर ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के संचालक रौशन आनंद की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनकी जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है, जिससे उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई है। पटना में कई छात्र संगठनों और समर्थकों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन और आक्रोश मार्च की घोषणा की है। रौशन आनंद के समर्थकों का आरोप है कि जांच निष्पक्ष नहीं हो रही, जबकि दूसरी तरफ खान सर के समर्थक इसे उनके खिलाफ चलाया जा रहा अभियान बता रहे हैं। दोनों शिक्षकों के लाखों छात्र और समर्थक सोशल मीडिया पर खुलकर अपने-अपने पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि यह मामला अब केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि छात्र समुदाय के बीच भावनात्मक और वैचारिक टकराव का विषय भी बन गया है।

हाईकोर्ट की सुनवाई, पुलिस जांच और कोचिंग इंडस्ट्री की साख दांव पर; आगे क्या होगा?

यह पूरा विवाद अब बिहार की कोचिंग इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। खान सर पर दर्ज एफआईआर, उनके गार्डों की गिरफ्तारी, रौशन आनंद की जेल यात्रा, छात्रों के प्रदर्शन, फायर विभाग की ओर से जारी नोटिस और अलग-अलग अदालतों में चल रही सुनवाई ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर की चर्चा बना दिया है। आने वाले दिनों में पटना हाईकोर्ट में खान सर की संभावित याचिका, रौशन आनंद की आगे की कानूनी रणनीति, गार्डों के खिलाफ चल रही सुनवाई और पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण साबित होगी। फिलहाल इतना तय है कि बिहार के शिक्षा जगत की यह सबसे चर्चित लड़ाई अभी खत्म होने वाली नहीं है। यह मामला केवल दो कोचिंग संचालकों के विवाद की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलती कोचिंग संस्कृति की तस्वीर भी है, जहां शिक्षा, प्रभाव, कारोबार, राजनीति और कानून एक साथ टकराते नजर आ रहे हैं।