बिहार की राजनीति में इन दिनों MLC सीट को लेकर सियासी हलचल तेज है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और NDA के बीच हुए कथित वादे को लेकर नई बहस छिड़ गई है। चर्चा है कि चुनाव के दौरान कुशवाहा को MLC सीट देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन हाल ही में उनके बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया। विपक्ष और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। वहीं बीजेपी ने भी पूरे मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि चुनाव के समय हुई बातचीत को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब चर्चा में आया जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से एक कथित पत्र सामने आया। दावा किया गया कि विधानसभा चुनाव के दौरान NDA और उपेंद्र कुशवाहा के बीच हुए राजनीतिक समझौते में MLC सीट को लेकर भी बात हुई थी। इसी आधार पर यह चर्चा शुरू हो गई कि कुशवाहा खेमे को MLC सीट दिए जाने का आश्वासन मिला था।मामला तब और गरमा गया जब हाल ही में घोषित MLC उम्मीदवारों की सूची में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या NDA अपने पुराने वादे से पीछे हट गई है। वहीं इस पूरे विवाद ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और गठबंधन के भीतर तालमेल को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
BJP ने क्या दी सफाई?
इस पूरे विवाद पर बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि चुनाव के दौरान जो पत्र जारी किया गया था, उसका संबंध सीटों के तालमेल और गठबंधन के समन्वय से था। उन्होंने साफ किया कि उस पत्र को MLC सीट देने के वादे या गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
दिलीप जायसवाल ने यह भी कहा कि NDA ने हमेशा अपने सहयोगियों का सम्मान किया है। उनके मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा को पहले राज्यसभा भेजा गया था, जो इस बात का प्रमाण है कि गठबंधन ने उन्हें उचित राजनीतिक महत्व दिया। बीजेपी का कहना है कि MLC सीट को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं और चुनावी समझौते की गलत व्याख्या की जा रही है।
दीपक प्रकाश का टिकट क्यों बना मुद्दा?
NDA ने विधान परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की, लेकिन इसमें मंत्री दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या यह फैसला उपेंद्र कुशवाहा द्वारा अपनी पार्टी का BJP में विलय नहीं करने से जुड़ा है। हालांकि बीजेपी ने सार्वजनिक रूप से इस तरह के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
उपेंद्र कुशवाहा का क्या रुख है?
उपेंद्र कुशवाहा पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनकी पार्टी RLM का BJP में विलय नहीं होगा। उन्होंने कहा कि RLM NDA का मजबूत सहयोगी है, लेकिन पार्टी की अपनी अलग पहचान और विचारधारा है।
