बेंगलुरु/मडिकेरी: कर्नाटक के पर्यटन क्षेत्र को झकझोर देने वाले अमेरिकी महिला पर्यटक से कथित यौन उत्पीड़न मामले ने अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार मंगलवार को इस मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने जा रही है। अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि किसी विदेशी महिला के साथ भारत में इस तरह का गंभीर अपराध होना बेहद चिंताजनक है और मामले की निष्पक्ष जांच सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यही वजह है कि अदालत ने आरोपी होमस्टे संचालक की उस मांग को तत्काल स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने की अपील की थी। कोर्ट का रुख इस बात का संकेत माना जा रहा है कि न्यायपालिका इस मामले को केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे के रूप में भी देख रही है।
होमस्टे में छुट्टियां मनाने पहुंची थीं अमेरिकी महिला, आरोपों ने हिला दिया पूरा घटनाक्रम
पूरे मामले की शुरुआत अप्रैल 2026 में हुई, जब अमेरिका के वॉशिंगटन से आई एक महिला पर्यटक कर्नाटक के कोडगु जिले के मडिकेरी स्थित एक निजी विला और होमस्टे में ठहरी हुई थी। पुलिस जांच के अनुसार, वहां कार्यरत झारखंड निवासी रसोइया वृजेश कुमार पर आरोप है कि उसने महिला को दिए गए एक मीठे पेय में नशीला पदार्थ मिलाया। शिकायत के मुताबिक, पेय पीने के बाद महिला अचेत हो गई और इसी स्थिति का फायदा उठाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया। घटना के बाद महिला को तत्काल मदद नहीं मिल सकी, जिससे मामला और गंभीर हो गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि इसके बाद पूरे घटनाक्रम को छिपाने की कोशिश भी की गई, जिसकी वजह से अब केवल यौन उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि साक्ष्य मिटाने और पीड़िता को बाहरी दुनिया से अलग रखने जैसे आरोप भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
वाई-फाई बंद करने और संपर्क रोकने के आरोप ने बढ़ाई होमस्टे मालिक की मुश्किलें
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, होमस्टे के मालिक पालेकंडा पोनप्पा उर्फ विशाल की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पुलिस का दावा है कि घटना के बाद विशाल ने कथित तौर पर तीन दिनों तक प्रॉपर्टी का वाई-फाई बंद रखा ताकि पीड़िता अमेरिकी दूतावास, स्थानीय प्रशासन या अपने परिचितों से संपर्क न कर सके। यह आरोप मामले को और अधिक गंभीर बना देता है, क्योंकि इससे पीड़िता की स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हुईं। बताया जाता है कि महिला किसी तरह वहां से निकलने में सफल हुई और उसने यह कहकर परिसर छोड़ा कि वह मैसूर घूमने जा रही है। मैसूर पहुंचते ही उसने अमेरिकी दूतावास से संपर्क किया, जिसके बाद पूरा मामला तेजी से आगे बढ़ा। विदेश मंत्रालय, स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियां सक्रिय हुईं और फिर आरोपी रसोइए तथा होमस्टे मालिक दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटनाक्रम ने जांच एजेंसियों को यह भी देखने पर मजबूर किया कि कहीं पर्यटक सुरक्षा के नाम पर चल रहे कुछ निजी होमस्टे नियामकीय ढांचे की अनदेखी तो नहीं कर रहे।
हाईकोर्ट की निगरानी, विदेश मंत्रालय की दिलचस्पी और पर्यटन व्यवस्था पर उठते सवाल
मामले ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। अमेरिकी नागरिक के शामिल होने के कारण विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भी मडिकेरी पहुंचकर जांच की प्रगति पर नजर रखी। पर्यटन विभाग की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि संबंधित होमस्टे को जनवरी 2024 में लाइसेंस मिला था, लेकिन उस पर सुरक्षा संबंधी कई मानकों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के पालन में गंभीर लापरवाही के आरोप हैं। कर्नाटक के पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि ऐसी घटनाएं राज्य और देश दोनों के लिए शर्मनाक हैं तथा सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतेगी। अब हाईकोर्ट की निगरानी, पुलिस जांच और सरकारी रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने भारत में विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा, निजी होमस्टे की जवाबदेही और पर्यटन उद्योग में नियामकीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
