दिल्ली की राजनीति में शनिवार को बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। करीब दो दशक तक अरविंद केजरीवाल के साथ सामाजिक आंदोलन से लेकर राजनीतिक सफर तय करने वाली स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ते हुए न सिर्फ अपनी नई राजनीतिक पारी का ऐलान किया, बल्कि अपने पुराने सहयोगी अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप भी लगाए।
स्वाति मालीवाल का भाजपा में शामिल होना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय तक आम आदमी पार्टी के भीतर एक मजबूत महिला चेहरा रही हैं। दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी मालीवाल ने कई बार महिला सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर मुखर आवाज उठाई थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उनका पार्टी नेतृत्व के साथ टकराव लगातार सार्वजनिक होता जा रहा था।
केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप
भाजपा में शामिल होने के बाद स्वाति मालीवाल ने खुलकर अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2006 से केजरीवाल के साथ जुड़ी थीं और हर आंदोलन में उनके साथ खड़ी रहीं, लेकिन बदले में उन्हें अपमान, धमकी और चुप कराने की कोशिश मिली। मालीवाल ने दावा किया कि जब उन्होंने अपने साथ हुई कथित मारपीट के मामले में आवाज उठाई तो उन पर मामला वापस लेने का दबाव बनाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डराया गया और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्हें संसद में बोलने का मौका तक नहीं दिया गया, जो यह दिखाता है कि पार्टी के भीतर असहमति की आवाजों के लिए कोई जगह नहीं बची थी।
भाजपा में शामिल होने की क्या बताई वजह?
स्वाति मालीवाल ने कहा कि उन्होंने किसी राजनीतिक दबाव या मजबूरी में भाजपा का दामन नहीं थामा है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार के फैसलों ने उन्हें प्रभावित किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय नेता बताते हुए कहा कि देशहित से जुड़े कई बड़े फैसलों ने उन्हें भाजपा के करीब आने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी तारीफ की और कहा कि वर्तमान नेतृत्व देश के लिए बड़े और निर्णायक फैसले लेने में सक्षम है।
आप में बढ़ती हलचल
स्वाति मालीवाल से पहले आम आदमी पार्टी के कई अन्य नेताओं के भाजपा में शामिल होने की खबरों ने भी राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी थी। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वाति मालीवाल का जाना सिर्फ एक नेता का पार्टी बदलना नहीं है, बल्कि यह आम आदमी पार्टी के अंदरूनी हालात पर भी सवाल खड़े करता है।
दिल्ली की राजनीति पर क्या असर?
दिल्ली में आम आदमी पार्टी पहले ही कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में स्वाति मालीवाल का भाजपा में जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा इसे अपने लिए बड़ी राजनीतिक सफलता के तौर पर देख रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वाति मालीवाल की नई राजनीतिक पारी दिल्ली की राजनीति में कितना असर डालती है और आम आदमी पार्टी इस झटके से कैसे उबरती है।
