मेट्रो स्टेशन और बड़े सार्वजनिक स्थानों पर यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नई स्मार्ट तकनीक के तहत लिफ्ट में फंसे यात्रियों की पहचान अब AI खुद करेगा और तुरंत मदद के लिए अलर्ट भेजेगा। इस सिस्टम का मकसद है कि अगर कोई व्यक्ति लिफ्ट में फंस जाए या किसी आपात स्थिति में हो, तो उसे मिनटों में सहायता मिल सके और लंबा इंतजार न करना पड़े।
दरअसल, यह समस्या लंबे समय से सामने आती रही है कि लिफ्ट अचानक बंद हो जाती है या तकनीकी खराबी के कारण रुक जाती है। ऐसे में अंदर फंसे लोगों को डर और घबराहट का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें बाहर निकालने में काफी समय लग जाता है। इसी चुनौती को हल करने के लिए तकनीकी कंपनियों और मेट्रो प्रशासन ने मिलकर AI आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है।
इस तकनीक पर रिसर्च पिछले कुछ वर्षों से चल रही थी। भारत में Delhi Metro Rail Corporation ने IIT जैसे तकनीकी संस्थानों और निजी टेक कंपनियों के साथ मिलकर इस दिशा में काम शुरू किया। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Hitachi और Otis जैसी कंपनियां पहले से ही स्मार्ट लिफ्ट सिस्टम पर रिसर्च कर रही हैं। इन कंपनियों ने AI, सेंसर और कैमरा टेक्नोलॉजी को मिलाकर ऐसे सिस्टम तैयार किए हैं जो लिफ्ट के अंदर की स्थिति को समझ सकते हैं।
इस सिस्टम को सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों और कॉर्पोरेट बिल्डिंग्स में टेस्ट किया गया। दिल्ली मेट्रो के कुछ व्यस्त स्टेशनों और हैदराबाद के आधुनिक मेट्रो स्टेशनों पर इसका ट्रायल किया गया, जहां रोज़ हजारों लोग लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। शुरुआती परीक्षणों में पाया गया कि AI सिस्टम कुछ ही सेकंड में यह पहचान लेता है कि लिफ्ट सामान्य रूप से चल रही है या उसमें कोई समस्या आ गई है।
तकनीक कैसे काम करती है, इसे आसान भाषा में समझें तो लिफ्ट के अंदर हाई-रिजोल्यूशन कैमरे और स्मार्ट सेंसर लगाए जाते हैं। ये सेंसर यह जांचते हैं कि लिफ्ट कितनी देर तक रुकी है, दरवाजा खुला है या बंद, और अंदर मौजूद लोगों की गतिविधियां कैसी हैं। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा देर तक स्थिर रहता है, घबराहट दिखाता है या लिफ्ट अचानक रुक जाती है, तो AI तुरंत इसे असामान्य स्थिति मानकर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देता है।
इसके अलावा लिफ्ट में एक ऑटोमेटेड वॉयस सिस्टम और इंटरकॉम भी होता है, जिससे फंसे हुए यात्री सीधे कंट्रोल रूम से बात कर सकते हैं। कुछ सिस्टम में तो ऐसा फीचर भी जोड़ा गया है कि AI खुद ही यात्रियों को शांत रहने और मदद आने की जानकारी देता है। इससे घबराहट कम होती है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक से रेस्क्यू टाइम काफी कम हो गया है। पहले जहां किसी को बाहर निकालने में 20-30 मिनट तक लग जाते थे, अब AI की मदद से 5 से 10 मिनट के भीतर सहायता पहुंचाई जा सकती है। यही कारण है कि इसे “स्मार्ट सेफ्टी सिस्टम” के रूप में देखा जा रहा
है।
हालांकि, इस नई व्यवस्था को लेकर कुछ लोगों ने प्राइवेसी पर सवाल भी उठाए हैं, क्योंकि लिफ्ट के अंदर लगातार कैमरों से निगरानी होगी। इस पर अधिकारियों का कहना है कि सभी डेटा सुरक्षित सर्वर पर रखा जाएगा और केवल इमरजेंसी की स्थिति में ही उसका उपयोग किया जाएगा।
आने वाले समय में इस तकनीक को देश के और शहरों में लागू करने की योजना है। अगर यह सिस्टम पूरी तरह सफल रहता है, तो न सिर्फ मेट्रो स्टेशनों बल्कि अस्पतालों, मॉल और ऑफिस बिल्डिंग्स में भी इसे अपनाया जा सकता है
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