पश्चिम एशिया में पिछले कई दिनों से जारी तनाव के बीच अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते नजर आ रहे हैं। भारत के लिए यह राहत भरी खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि खाड़ी देशों और इजरायल में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं, पढ़ाई करते हैं या कारोबार से जुड़े हुए हैं। अब कुवैत और इजरायल द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को फिर से खोलने के फैसले ने हजारों भारतीयों के लिए वापसी का रास्ता आसान कर दिया है। विदेश मंत्रालय लगातार पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, हालात में पहले के मुकाबले सुधार देखा जा रहा है और कई देशों ने धीरे-धीरे नागरिक उड़ानों को अनुमति देना शुरू कर दिया है।

कुवैत और इजरायल से जल्द सामान्य होंगी उड़ानें

कुवैत और इजरायल ने अपने एयरस्पेस को नागरिक विमानों के लिए खोल दिया है। इसके बाद भारत के लिए उड़ानों का संचालन जल्द तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। कुवैत से भारत आने वाली दो प्रमुख एयरलाइंस सीमित स्तर पर अपनी सेवाएं दोबारा शुरू करने की तैयारी में हैं। इससे उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से उड़ानों के बाधित होने के कारण फंसे हुए थे।

इजरायल से भी सीमित उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं, जिससे वहां मौजूद भारतीय नागरिकों को वापस लौटने का विकल्प मिला है।

खाड़ी देशों से लगातार लौट रहे भारतीय

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 28 फरवरी से अब तक करीब 12.38 लाख भारतीय इस क्षेत्र से वापस लौट चुके हैं। संयुक्त अरब अमीरात से रोजाना लगभग 110 उड़ानें भारत के लिए संचालित हो रही हैं। इसके अलावा सऊदी अरब, ओमान, बहरीन और इराक से भी सीमित उड़ान सेवाएं जारी हैं। कतर का हवाई क्षेत्र अभी आंशिक रूप से खुला है, लेकिन वहां से भी कुछ उड़ानों का संचालन हो रहा है।

ईरान को लेकर अभी भी सतर्कता

हालांकि ईरान को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। वहां का एयरस्पेस आंशिक रूप से खुला है, लेकिन भारतीय दूतावास ने लोगों को फिलहाल ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है। जो भारतीय नागरिक ईरान में मौजूद हैं, उन्हें जमीनी रास्तों के जरिए सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया जारी है। अब तक 2,432 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें बड़ी संख्या छात्रों और मछुआरों की है।


सरकार का चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे काम कर रहा है। अब तक हजारों फोन कॉल और ईमेल का जवाब दिया जा चुका है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और लगातार यात्रा संबंधी सलाह जारी कर रहे हैं।


समुद्री रास्तों पर भी निगरानी

सिर्फ हवाई नहीं बल्कि समुद्री मार्गों पर भी सरकार लगातार नजर रख रही है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। अब तक 2,729 से ज्यादा भारतीय नाविक सुरक्षित वापस लाए जा चुके हैं। सरकार ने यह भी साफ किया है कि देश के बंदरगाहों पर किसी तरह की कोई रुकावट नहीं है और सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है।


भारतीयों के लिए राहत की खबर

पश्चिम एशिया में तनाव ने हजारों भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने से राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि सरकार अभी भी सतर्क है और नागरिकों से अपील कर रही है कि वे आधिकारिक सलाह का पालन करें। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि पश्चिम एशिया से भारत लौटने का रास्ता फिर खुलता नजर आ रहा है।