दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइनों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका अलर्ट मोड में आ गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि अगर ईरान होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही रोकता है या कोई समझौता नहीं करता, तो अमेरिका और सहयोगी देशों का 'प्लान B' तैयार है। इस रणनीति पर NATO देशों से भी बातचीत हो चुकी है।

रुबियो ने स्वीडन में क्या कहा?

NATO विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका चाहता है ईरान होर्मुज मार्ग को खुला रखे। अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर किसी तरह की रोक या शुल्क न लगे।

अगर ऐसा नहीं होता तो वैकल्पिक रणनीति यानी 'प्लान B' लागू किया जा सकता है. रुबियो ने इसे "अस्वीकार्य" बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हर कीमत पर खुला रहना चाहिए।

क्या है अमेरिका का 'प्लान B'?

रिपोर्ट्स के मुताबिक 'प्लान B' के तहत अमेरिका और कुछ NATO सहयोगी देश मिलकर होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए संयुक्त समुद्री सुरक्षा अभियान चला सकते हैं।

रुबियो ने साफ किया कि यह जरूरी नहीं कि सीधा NATO मिशन हो। लेकिन NATO के कई देश इसमें सहयोग कर सकते हैं।

होर्मुज क्यों है इतना अहम?

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की सबसे बड़ी धमनी माना जाता है. दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में LNG इसी रास्ते से गुजरती है।

अगर यहां तनाव बढ़ा या जहाजों की आवाजाही रुकी, तो सीधा असर ग्लोबल मार्केट और ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा। भारत समेत कई देश इसी रूट पर निर्भर हैं।

अमेरिका की चिंता की वजह

अमेरिका को आशंका है कि ईरान होर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर नियंत्रण या शुल्क प्रणाली लागू करने की कोशिश कर सकता है। वॉशिंगटन इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन मानता है।

पहली प्राथमिकता: कूटनीति

रुबियो ने कहा कि अमेरिका की पहली प्राथमिकता कूटनीतिक समझौता है। ईरान के साथ बातचीत में "हल्की प्रगति" हुई है, लेकिन स्थिति अब भी संवेदनशील है।

अगर बातचीत सफल नहीं होती, तभी 'प्लान B' पर गंभीरता से आगे बढ़ा जाएगा।

होर्मुज को लेकर अमेरिका की सक्रियता और NATO से बातचीत ने वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या ईरान-अमेरिका में समझौता होता है या दुनिया को 'प्लान B' अमल में आता दिखेगा।