आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए यह सीजन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। पांच बार की चैंपियन टीम से फैंस को जिस दबदबे और शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी, वह इस बार मैदान पर बिल्कुल नजर नहीं आया। गुरुवार को खेले गए सीजन के 66वें मुकाबले में गुजरात टाइटंस ने चेन्नई सुपर किंग्स को 89 रनों के बड़े अंतर से हराकर उसके प्लेऑफ में पहुंचने के सपने को पूरी तरह खत्म कर दिया। इस हार के साथ ही चेन्नई सुपर किंग्स इस सीजन प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने वाली तीसरी टीम बन गई। इससे पहले लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस भी टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थीं, जबकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, गुजरात टाइटंस और सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले ही अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली थी।
नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट पर 229 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। गुजरात के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही चेन्नई के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा और किसी भी गेंदबाज को वापसी का मौका नहीं दिया। जवाब में 230 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम पहली ही गेंद पर संजू सैमसन के विकेट के रूप में बड़ा झटका खा बैठी। इसके बाद कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और मैथ्यू शॉर्ट ने साझेदारी कर टीम को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन जैसे ही कप्तान आउट हुए, पूरी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पूरी टीम सिर्फ 13.4 ओवर में 140 रन पर ऑलआउट हो गई।
चेन्नई सुपर किंग्स ने इस सीजन 14 मुकाबलों में सिर्फ 6 जीत हासिल कीं और 12 अंकों के साथ अंक तालिका में सातवें स्थान पर रहकर अपना सफर खत्म किया। पूरे सीजन में टीम कभी बल्लेबाजी में संघर्ष करती नजर आई तो कभी गेंदबाजी पूरी तरह बेअसर साबित हुई। आइए जानते हैं वे 5 सबसे बड़ी वजहें जिन्होंने इस साल चेन्नई सुपर किंग्स का पूरा सीजन बर्बाद कर दिया।
1. ठोस रणनीति का पूरी तरह अभाव
इस पूरे टूर्नामेंट में चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बिना किसी स्पष्ट रणनीति के खेलती नजर आई। मैच की परिस्थितियों और विपक्षी टीम के अनुसार गेम प्लान बदलने में टीम पूरी तरह असफल रही। कई मुकाबलों में ऐसा लगा कि टीम पहले से तय योजना के साथ मैदान पर उतरी ही नहीं है। विकेट के व्यवहार को समझने और उसी हिसाब से गेंदबाजी व बल्लेबाजी में बदलाव करने की क्षमता टीम में दिखाई नहीं दी। कप्तानी और टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर भी लगातार सवाल उठते रहे।
2. टॉप ऑर्डर की लगातार विफलता
टी20 क्रिकेट में तेज शुरुआत किसी भी टीम के लिए बेहद जरूरी होती है, लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स का टॉप ऑर्डर पूरे सीजन रन बनाने के लिए संघर्ष करता रहा। कई अहम मुकाबलों में शुरुआती विकेट जल्दी गिरने की वजह से टीम दबाव में आ गई। गुजरात टाइटंस के खिलाफ करो या मरो वाले मैच में भी संजू सैमसन पहली ही गेंद पर आउट हो गए। कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और मैथ्यू शॉर्ट अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे। इसका सीधा असर मिडिल ऑर्डर पर पड़ा और टीम कभी बड़े लक्ष्य का पीछा करने में सहज नजर नहीं आई।
3. ट्रांजिशन और टीम कॉम्बिनेशन की समस्या
इस सीजन चेन्नई सुपर किंग्स नए और पुराने खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाने में पूरी तरह उलझी रही। कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने भी स्वीकार किया कि कुछ खिलाड़ियों के अचानक बाहर होने से टीम का संतुलन बिगड़ गया। रामकृष्णा घोष और क्रेग ओवर्टन जैसे खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने टीम को काफी नुकसान पहुंचाया। लगातार बदलावों की वजह से कोई स्थायी प्लेइंग इलेवन तैयार नहीं हो सकी और टीम हर मैच में नए कॉम्बिनेशन के साथ उतरती रही।
4. अनुभवहीन मिडिल ऑर्डर पूरी तरह फ्लॉप
चेन्नई सुपर किंग्स का मिडिल ऑर्डर इस सीजन उसकी सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ। टीम के कई बल्लेबाज ऐसे थे जिन्हें आईपीएल का ज्यादा अनुभव नहीं था। जब भी टॉप ऑर्डर फेल हुआ, मिडिल ऑर्डर दबाव में टूटता नजर आया। युवा बल्लेबाज जिम्मेदारी लेने के बजाय जल्दबाजी में शॉट खेलकर विकेट गंवाते रहे। यही वजह रही कि टीम कई मैचों में अच्छी स्थिति से भी मुकाबला हार गई।
5. बेअसर गेंदबाजी और खराब नेट रन-रेट
चेन्नई सुपर किंग्स की गेंदबाजी इस पूरे सीजन में उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। पावर-प्ले में विकेट निकालने में नाकामी और डेथ ओवरों में जमकर रन लुटाना टीम की सबसे बड़ी कमजोरी बन गया। गुजरात टाइटंस के खिलाफ भी गेंदबाज 229 रन रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे। कई मुकाबलों में टीम को बड़े अंतर से हार मिली, जिसका सीधा असर नेट रन-रेट पर पड़ा। आखिर में यही खराब नेट रन-रेट चेन्नई सुपर किंग्स के प्लेऑफ के गणित को पूरी तरह बिगाड़ गया।
कुल मिलाकर आईपीएल 2026 का यह सीजन चेन्नई सुपर किंग्स के लिए निराशा, गलत रणनीतियों, कमजोर प्रदर्शन और लगातार असफलताओं से भरा रहा। अब फैंस की नजर अगले सीजन पर होगी, जहां टीम मैनेजमेंट बड़े बदलाव कर एक नई शुरुआत करने की कोशिश करेगा।
