धामपुर की तंग गलियों में रोज़ की तरह दौड़ता-भागता एक युवक—हाथ में पिज्जा का डिब्बा, चेहरे पर जिम्मेदारियों का बोझ। यही है फिरोज अहमद की दुनिया। लेकिन एक दिन अचानक एक कागज़ ने उसकी जिंदगी को उलट-पुलट कर दिया। वह कागज़ था आयकर विभाग का नोटिस, जिसमें लिखा था—उसके नाम पर करोड़ों का कारोबार चल रहा है।


धामपुर के गांव पृथ्वीपुर बनवारी का रहने वाला फिरोज, जो दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार का पेट पालता है, कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसका नाम एक बड़ी फर्म से जुड़ जाएगा। नोटिस में बताया गया कि उसके पैन कार्ड पर WYN IMPEX नाम की कंपनी दर्ज है, जिसने साल 2020 में करीब 9.49 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया है।


यह सुनते ही फिरोज के पैरों तले जमीन खिसक गई। “साहब, मैं तो पिज्जा बांटता हूं, ये करोड़ों का धंधा किसका है?”—उसका यह सवाल आज भी जवाब मांग रहा है।


जांच में जो सामने आया, वह और भी चौंकाने वाला था। 14 जुलाई 2020 को उसके पैन कार्ड का इस्तेमाल कर फर्म का पंजीकरण कराया गया था। लेकिन इसमें इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, ईमेल, दस्तावेज और यहां तक कि हस्ताक्षर भी पूरी तरह फर्जी थे। यानी किसी ने उसकी पहचान चुराकर उसे करोड़ों के ‘कागजी कारोबार’ का मालिक बना दिया।


एक तरफ आयकर विभाग के नोटिस, दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन की धीमी रफ्तार—फिरोज दो पाटों के बीच फंस गया है। उसने स्थानीय पुलिस और एसपी अभिषेक झा से शिकायत की, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई का इंतजार जारी है।


हर नए नोटिस के साथ उसका डर और बढ़ जाता है। न उसके पास इतना पैसा है कि वह लंबी कानूनी लड़ाई लड़ सके, न ही इतनी समझ कि इस जटिल जाल को अकेले सुलझा पाए। धीरे-धीरे यह मामला सिर्फ एक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक गरीब इंसान की जिंदगी पर भारी बोझ बनता जा रहा है।


यह कहानी सिर्फ फिरोज की नहीं है। यह उन हजारों लोगों की सच्चाई को सामने लाती है, जिनकी पहचान का दुरुपयोग कर उन्हें फर्जी मामलों में फंसा दिया जाता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक मेहनतकश लोग इस तरह के खेल का शिकार होते रहेंगे—और कब तक न्याय सिर्फ इंतजार ही बना रहेगा?