कर्नाटक के कलबुर्गी से आई यह खबर पूरे देश को झकझोर देती है। डॉक्टर बनने का सपना लेकर आगे बढ़ रही एक 18 साल की NEET अभ्यर्थी जो पढ़ाई में तेज थी, 92% अंक लाई थी, परिवार की उम्मीदों का केंद्र थी उसने परीक्षा के तनाव और भविष्य की अनिश्चितता के बीच ऐसा कदम उठा लिया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।NEET जैसी कठिन राष्ट्रीय परीक्षा, पेपर लीक विवाद, दोबारा परीक्षा का टेंशन… और इसके बीच एक छात्रा की ज़िंदगी यूँ खत्म हो जाना, यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि हमारे सिस्टम और समाज से पूछा गया एक बहुत बड़ा सवाल है क्या हम अपने बच्चों पर पढ़ाई का दबाव इतना बढ़ा रहे हैं कि वे टूटने लगे हैं?
क्या हुआ?
कलबुर्गी में रहने वाली 18 वर्षीय NEET अभ्यर्थी भाग्यश्री ने परीक्षा देने के बाद घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।पुलिस को उसका शव उसके कमरे में मिला, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।भाग्यश्री ने हाल ही में NEET-UG परीक्षा दी थी, लेकिन इस साल पेपर लीक विवाद और जांच के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिसे अब 21 जून को फिर से आयोजित किया जाना है। यही वजह अभ्यर्थियों में अतिरिक्त तनाव पैदा कर रही है।
परिवार क्या कहता है?
परिवार ने पुलिस को बताया कि उनका घर-परिवार बिल्कुल सामान्य था और भाग्यश्री पढ़ाई में बेहद तेज थी। PUC (12th) में उसने 92% अंक हासिल किए थे और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी। पिता राजशेखर का कहना है कि बेटी हमेशा पढ़ाई को लेकर गंभीर रहती थी, लेकिन उन्हें कभी अंदाज़ा नहीं हुआ कि वह अंदर से इतनी टूट रही थी या किसी गहरे तनाव में है।
पुलिस जांच के अनुसार
मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि भाग्यश्री ने यह कदम सिर्फ परीक्षा के तनाव की वजह से उठाया या इसके पीछे कोई अन्य निजी कारण भी था। जांच अधिकारी परिवार, दोस्तों और हाल के दिनों की परिस्थितियों से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं।
घटना के बाद उठे सवाल
घटना के बाद देशभर में कई गंभीर सवाल एक बार फिर उठ खड़े हुए हैं। क्या NEET जैसा कठोर और प्रतिस्पर्धात्मक सिस्टम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा कर रहा है? बार-बार की परीक्षा, पेपर लीक के विवाद और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएँ आखिर बच्चों पर कितना अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं? साथ ही, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या परिवार और समाज को बच्चों से ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए, ताकि वे अनावश्यक मानसिक तनाव से बच सकें।
