मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पिपरिया सिविल अस्पताल में एक ओटी अटेंडर ने बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी के एक युवा महिला की ब्रेस्ट सर्जरी कर दी। इतना ही नहीं, उसने खुद पर्ची बनाई और बाद में मरीज से पैसे भी वसूले। शिकायत के बाद मामला उजागर हुआ है और अब प्रशासन कार्रवाई की बात कर रहा है।

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के पिपरिया सिविल अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां अस्पताल में तैनात एक ओटी (ऑपरेशन थिएटर) अटेंडर ने अपनी सीमा से बाहर जाकर एक महिला का ऑपरेशन कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, ग्राम सिंगानामा की करीब 20-22 साल की एक महिला को ब्रेस्ट में गठान (गांठ) की समस्या थी। इलाज के लिए वह पिपरिया सिविल अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद ओटी अटेंडर बरसाती लाल मांझी ने बिना किसी विशेषज्ञ सर्जन डॉक्टर की मौजूदगी और बिना जरूरी मेडिकल जांच के महिला की सर्जरी कर दी।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी डॉक्टर की अनुमति नहीं ली गई। यहां तक कि नियमित ओपीडी पर्ची भी नहीं बनाई गई थी। बताया जा रहा है कि अटेंडर ने खुद ही पर्ची तैयार की और उसी के आधार पर ऑपरेशन कर दिया।

परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद भी महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि अटेंडर ने कई दिनों तक घाव पर बार-बार चीरा लगाया, जिससे महिला को काफी दर्द सहना पड़ा और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया। महिला की हाल ही में पहली डिलीवरी हुई थी, ऐसे में उसकी हालत और भी नाजुक हो गई।

जब परिजनों को इस पूरे मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।

अस्पताल के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) ने कहा है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी पूरी जांच की जा रही है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अटेंडर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले ही सुविधाओं की कमी होती है, और अब इस तरह की घटनाएं मरीजों के भरोसे को पूरी तरह से तोड़ रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि बिना योग्य डॉक्टर के किसी भी तरह की सर्जरी करना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पतालों में सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।