नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। जिस आजिंक्य शिंदे को पार्टी के प्रमुख नेताओं की हिरासत के बाद आंदोलन की कमान सौंपी गई थी, उन्हें मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। शिंदे पार्टी के सह संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ जंतर-मंतर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। आरोप है कि तीनों नेता एक गेट फांदकर प्रदर्शन स्थल में दाखिल हुए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
10 अक्टूबर को शिंदे को बनाया गया था आंदोलन का चेहरा
सीजेपी के लिए 10 अक्टूबर का दिन काफी अहम रहा था। उस दिन पार्टी के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका समेत कई लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन के नेतृत्व को लेकर स्थिति बदल गई थी। ऐसे समय में आजिंक्य शिंदे को आंदोलन की जिम्मेदारी सौंपी गई। अभिजीत दीपके ने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश के जरिए बताया था कि उनकी अनुपस्थिति में शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
पहले गिरफ्तारी से बचे, अब खुद पहुंचे प्रदर्शन स्थल
10 अक्टूबर को हुई कार्रवाई के दौरान शिंदे उन नेताओं में शामिल थे, जो पुलिस की हिरासत में नहीं आए थे। वह प्रदर्शन से तीन दिन पहले ही दिल्ली पहुंच गए थे और पार्टी ने उन्हें वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में सुरक्षित रखा था। बाद में जब पार्टी के नेता हिरासत से बाहर आ गए, तब शिंदे ने भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया। इस बार पुलिस की कार्रवाई से वह भी नहीं बच सके।
जंतर-मंतर में प्रवेश के लिए अपनाया दूसरा रास्ता
मंगलवार सुबह सीजेपी के कुछ प्रमुख नेता और कार्यकर्ता अचानक जंतर-मंतर पहुंचे। वहां जाने वाले मुख्य रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण उन्होंने कथित तौर पर एक ऐसे प्रवेश द्वार का इस्तेमाल किया, जहां उस समय सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। नेता और कार्यकर्ता गेट फांदकर परिसर में दाखिल हो गए। हालांकि, अंदर पहुंचते ही वहां तैनात सुरक्षाकर्मी सतर्क हो गए और पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया।
हिरासत के दौरान लगाए नारे, पार्टी ने बताया अपनी जीत
पुलिस की कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए सीजेपी नेताओं ने ‘भारत माता की जय’ और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे लगाए। इसके बाद पुलिस उन्हें वाहनों में बैठाकर अपने साथ ले गई। दूसरी ओर, सीजेपी ने इस घटनाक्रम को अपनी कामयाबी बताते हुए दावा किया कि उसने जंतर-मंतर के किले को भेद दिया है।
जंतर-मंतर को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
जंतर-मंतर को दो दिन पहले ही आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद सीजेपी नेताओं के वहां पहुंचने की कोशिश ने पूरे घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की हिरासत से शुरू हुआ संकट अब आजिंक्य शिंदे की गिरफ्तारी तक पहुंच गया है। ऐसे में आंदोलन की आगे की रणनीति और पार्टी के अगले कदमों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
