नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शराब उद्योग से जुड़े एक महत्वपूर्ण नियामकीय कदम के तहत कुछ लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांडों की बिक्री पर रोक लगा दी है। नियामक का कहना है कि इन उत्पादों में प्राकृतिक एजिंग प्रक्रिया या पारंपरिक निर्माण पद्धति के बजाय कृत्रिम (आर्टिफिशियल) अथवा नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया। जांच के आधार पर इन उत्पादों को "सब-स्टैंडर्ड" श्रेणी में रखा गया है। यह कार्रवाई देश के शराब उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्यों की गई यह कार्रवाई
FSSAI के अनुसार कुछ उत्पादों में स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए ऐसे फ्लेवर का उपयोग किया गया, जिन्हें नियामक ने प्राकृतिक निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना।
प्राधिकरण का कहना है कि रम में रम फ्लेवर या व्हिस्की में व्हिस्की फ्लेवर मिलाना वैश्विक स्तर पर मान्य निर्माण प्रक्रिया नहीं माना जाता। इसके कारण प्राकृतिक एजिंग और निर्माण प्रक्रिया प्रभावित होती है।
भारत के बड़े शराब बाजार पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में शामिल है। यहां हर वर्ष लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी करीब तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है।
ऐसे में FSSAI की यह कार्रवाई केवल कुछ उत्पादों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूरे उद्योग के लिए गुणवत्ता मानकों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
किन कंपनियों और ब्रांडों पर हुई कार्रवाई
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई डियाजियो इंडिया (United Spirits), इनब्रू बेवरेजेज तथा कुछ अन्य कंपनियों के चुनिंदा उत्पादों पर की गई है।
प्रभावित ब्रांडों में एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की (Antiquity Blue Whisky), रॉयल चैलेंज व्हिस्की (Royal Challenge Whisky), मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम (McDowell's No.1 Rum), बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की (Bagpiper Deluxe Whisky), ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम (Old Cask Deluxe XXX Rum) तथा ओल्ड मंक (Old Monk) के कुछ वैरिएंट शामिल बताए गए हैं, जिनका निर्माण विभिन्न राज्यों की फैक्ट्रियों में किया जाता है।
जांच में क्या सामने आया
FSSAI की जांच में संबंधित उत्पादों में बाहरी आर्टिफिशियल अथवा नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर पाए जाने का दावा किया गया है।
इसी आधार पर इन उत्पादों को "सब-स्टैंडर्ड" श्रेणी में रखा गया और इनके विरुद्ध नियामकीय कार्रवाई की गई।
यूनाइटेड स्प्रिट्स ने फैसले पर जताई आपत्ति
यूनाइटेड स्प्रिट्स (United Spirits) ने FSSAI की इस कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई है।
कंपनी का कहना है कि उसके उत्पादों के लेबल वर्तमान भारतीय नियमों के अनुरूप हैं और यह केवल उसकी कंपनी का नहीं, बल्कि पूरे उद्योग से जुड़ा विषय है।
कंपनी पहुंची अदालत
कंपनी ने अपने एक रम उत्पाद से जुड़े मामले में अदालत का रुख किया है। साथ ही व्हिस्की से संबंधित आदेशों को भी कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
दूसरी ओर FSSAI का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध हों।
गुणवत्ता मानकों पर बढ़ी नियामकीय सख्ती
इस कार्रवाई को भारत में खाद्य एवं पेय पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में गुणवत्ता मानकों के पालन और लेबलिंग संबंधी नियमों पर नियामक संस्थाओं की निगरानी और अधिक सख्त हो सकती है।
