वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण को लेकर देशभर में चल रहा सबसे बड़ा प्रशासनिक अभियान अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड करने की तय समयसीमा समाप्त हो चुकी है। इस बीच उत्तर प्रदेश में करीब 31 हजार वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अभाव में निरस्त होने की खबर ने नई बहस छेड़ दी है, जबकि बिहार ने दावा किया है कि राज्य की सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया गया है। दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए समयसीमा बढ़ाने की मांग उठाई है।UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन

UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन

उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी चुनौती, हजारों वक्फ संपत्तियां रिकॉर्ड से बाहर

देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 1.52 लाख वक्फ प्रतिष्ठान दर्ज हैं, जिनमें से करीब 1.03 लाख को आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त है। जून 2026 तक 1.31 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों के दस्तावेज UMEED पोर्टल पर अपलोड किए गए, लेकिन हजारों संपत्तियां निर्धारित समयसीमा तक पूरी प्रक्रिया नहीं कर सकीं। दस्तावेजों की कमी के कारण लगभग 31 हजार रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए गए। तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए वक्फ ट्रिब्यूनल ने पहले अतिरिक्त छह महीने की राहत दी थी, लेकिन 30 जून के साथ यह अवधि भी समाप्त हो गई।

बिहार ने पेश किया अलग मॉडल, 12 हजार से अधिक संपत्तियां हुईं डिजिटल

जहां कई राज्यों में प्रक्रिया अधूरी रही, वहीं बिहार ने डिजिटल पंजीकरण में बेहतर प्रदर्शन का दावा किया है। बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड के अनुसार 2,819 इस्टेट की लगभग 6,700 संपत्तियां UMEED पोर्टल पर दर्ज की गई हैं, जबकि शिया वक्फ बोर्ड की 307 इस्टेट से जुड़ी 5,955 संपत्तियां भी पोर्टल पर अपलोड हो चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि राज्य की सभी वक्फ संपत्तियों का शत-प्रतिशत पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। अब बोर्ड का अगला फोकस वक्फ जमीनों पर अवैध कब्जे हटाने और रिकॉर्ड के आधार पर कानूनी कार्रवाई को तेज करना है।

डिजिटल रिकॉर्ड के बाद अब अतिक्रमण सबसे बड़ी चुनौती

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के अनुसार बिहार वक्फ बोर्ड के पास लगभग दो लाख एकड़ भूमि दर्ज है। इनमें सबसे अधिक संपत्तियां पटना, मुजफ्फरपुर और गया जिलों में स्थित हैं। वक्फ बोर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा शिकायतें इन जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर आती हैं। बोर्ड ने सभी जिलों से अतिक्रमित वक्फ संपत्तियों का अद्यतन विवरण मांगा है और रिकॉर्ड के आधार पर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि डिजिटलीकरण पूरा होने के बाद वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों और अतिक्रमण के मामलों में कार्रवाई पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकेगी।

AIMPLB की मोहलत की मांग और आगे की राह

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि देशभर में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों के पुराने दस्तावेज दशकों पुराने हैं, जिनका डिजिटलीकरण अभी तक संभव नहीं हो पाया है। ऐसे में समयसीमा बढ़ाना जरूरी है ताकि कोई वास्तविक वक्फ संपत्ति रिकॉर्ड से बाहर न रह जाए। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सामान्य रूप से समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी और वास्तविक कठिनाई वाले मामलों में संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष आवेदन करना होगा। अब निगाहें केंद्र सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों पर हैं कि क्या समयसीमा समाप्त होने के बाद कोई अतिरिक्त राहत या नई व्यवस्था लागू की जाती है, या फिर डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तेज होगी।