उद्धव ठाकरे, तस्वीर । | Source: Chrome

उद्धव ठाकरे, तस्वीर।Source : Chrome

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को लेकर सियासी हलचल लगातार बनी हुई है। हाल ही में पार्टी के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना-यूबीटी पर नए संकट की चर्चा तेज हो गई। इसी बीच यह अटकलें भी लगाई जाने लगीं कि कहीं पार्टी के विधायक भी उनका साथ न छोड़ दें। हालांकि, मातोश्री में हुई विधायक दल की बैठक और उसमें लगभग सभी विधायकों की मौजूदगी ने फिलहाल इन चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की है।

मातोश्री में हुई विधायकों की अहम बैठक

शिवसेना-यूबीटी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की तस्वीर साझा की। उन्होंने तस्वीर के साथ लिखा, आज मातोश्री में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सभी विधायकों की बैठक हुई। कोई चिंता की बात नहीं, ऑल इज वेल... सब ठीक है।इस पोस्ट को पार्टी की ओर से एक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

सांसदों की बगावत के बाद बढ़ी थीं अटकलें

हाल ही में शिवसेना-यूबीटी को बड़ा झटका तब लगा था, जब उसके नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि अब विधानसभा में भी पार्टी टूट का सामना कर सकती है।

20 विधायकों पर टिकी थीं सभी की नजरें

फिलहाल शिवसेना-यूबीटी के पास विधानसभा में 20 विधायक हैं। ऐसे में यदि इनमें भी बड़ी टूट होती, तो पार्टी को राजनीतिक ही नहीं बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता था। यही वजह रही कि मातोश्री में बुलाई गई विधायक दल की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं।

बैठक में लगभग सभी विधायक पहुंचे

बैठक की खास बात यह रही कि पार्टी के लगभग सभी विधायक इसमें शामिल हुए। संजय राउत द्वारा साझा की गई तस्वीर के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि फिलहाल विधायक उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं और पार्टी में किसी तरह की टूट नहीं हुई है।

क्या इससे खत्म हो गई बगावत की चर्चा?

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल एक बैठक या तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले तीन वर्षों के दौरान कई ऐसे मौके आए हैं, जब पहले एकजुटता दिखाई गई और बाद में बड़े पैमाने पर राजनीतिक बगावत देखने को मिली।

राहत जरूर, लेकिन चुनौती अभी बाकी

फिर भी मौजूदा परिस्थितियों में यह बैठक उद्धव ठाकरे के लिए राहत भरी मानी जा रही है। सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद सबसे बड़ी चुनौती विधायकों को एकजुट रखना था। अगर इस समय विधायक भी अलग हो जाते, तो पार्टी की स्थिति और कमजोर हो सकती थी।

ऑल इज वेल से दिया राजनीतिक संदेश

संजय राउत की पोस्ट को सिर्फ बैठक की जानकारी नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए एक भरोसे के संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।ऑल इज वेलऔर सब ठीक है जैसे शब्दों के जरिए यह जताने की कोशिश की गई कि फिलहाल पार्टी के भीतर हालात नियंत्रण में हैं।हालांकि, राजनीतिक चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सांसदों की बगावत ने यह साफ कर दिया है कि शिवसेना-यूबीटी को आने वाले समय में अपने संगठन को संभालकर रखना होगा। फिलहाल मातोश्री में हुई यह बैठक उद्धव ठाकरे के लिए राहत की खबर जरूर लेकर आई है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या होगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।