वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार एवं विनिर्माण सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को लेकर एक बार फिर तीखी टिप्पणी की है। नवारो ने दावा किया है कि भारत उन देशों के नेटवर्क का हिस्सा है, जिनके माध्यम से चीन अपने सामान को अमेरिकी आयात शुल्क से बचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने भारत को लेकर कहा कि “भारत पूरी तरह से हमारे रडार स्क्रीन पर है।”
नवारो के इस बयान के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी सलाहकार ने आरोप लगाया है कि चीन तीसरे देशों के जरिए अपने सामान को अमेरिका तक पहुंचाकर भारी शुल्क से बचने की कोशिश करता है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में कुछ देशों में मामूली स्तर की प्रसंस्करण, दोबारा लेबल लगाने या पैकेजिंग बदलने जैसी गतिविधियां की जाती हैं, जिससे सामान का मूल देश अलग दिखाई देने लगता है।
क्या है नवारो का ‘द ग्रेट ट्रांस-शिपमेंट स्कैम’ दावा?
पीटर नवारो की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में चीन से जुड़े कथित व्यापारिक नेटवर्क को ‘द ग्रेट ट्रांस-शिपमेंट स्कैम’ के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस व्यवस्था के कारण अमेरिका को हर साल करीब 19 अरब डॉलर से 26 अरब डॉलर तक के संभावित आयात शुल्क राजस्व का नुकसान हो रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन से आने वाले सामान को सीधे अमेरिका भेजने के बजाय तीसरे देशों के माध्यम से भेजा जाता है। इससे उन उत्पादों को अमेरिकी शुल्क व्यवस्था से बचाने की कोशिश की जाती है, जो सीधे चीन से आने पर अधिक आयात शुल्क के दायरे में आ सकते हैं।
हालांकि, ये आरोप अमेरिकी सलाहकार और उनकी रिपोर्ट की ओर से किए गए दावों पर आधारित हैं। भारत का नाम इस संदर्भ में अमेरिकी रिपोर्ट में शामिल किए जाने से दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
40 से ज्यादा देशों का नाम, भारत भी सूची में
नवारो की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2018 के बाद से चीन से जुड़े इस कथित नेटवर्क का विस्तार 40 से अधिक देशों तक हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन देशों के माध्यम से चीन अपने निर्यात को अमेरिकी शुल्क से बचाने के लिए अलग रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है।
इस कथित नेटवर्क में अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदारों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें भारत के अलावा मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया का भी उल्लेख किया गया है।
नवारो का आरोप है कि यह व्यवस्था चीन को अपने उत्पादों को दूसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में मदद करती है। उनका दावा है कि इससे चीनी उत्पादों पर लागू होने वाले शुल्क के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
कैसे काम करता है कथित ‘शैडो नेटवर्क’?
अमेरिकी रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के अनुसार, चीन से आने वाले उत्पादों को तीसरे देशों में भेजा जाता है। वहां उन उत्पादों पर सीमित स्तर की प्रसंस्करण प्रक्रिया अपनाई जाती है या उनकी पैकेजिंग और लेबल में बदलाव किया जाता है।
इसके बाद सामान को इस तरह पेश किया जा सकता है कि उसका मूल देश चीन के बजाय कोई दूसरा देश दिखाई दे। नवारो का आरोप है कि इस तरह की प्रक्रिया के जरिए चीनी उत्पाद अमेरिकी शुल्क व्यवस्था से बचने की कोशिश करते हैं।
रिपोर्ट में इसी तरह की व्यापारिक गतिविधियों को कथित ‘शैडो नेटवर्क’ से जोड़ते हुए दावा किया गया है कि इससे चीन को अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखने में मदद मिलती है।
‘भारत हमारे रडार पर है’, नवारो ने दी चेतावनी
पीटर नवारो ने इस मुद्दे पर भारत का नाम सीधे लेते हुए कहा, “भारत पूरी तरह से हमारे रडार स्क्रीन पर है।” उन्होंने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन की नई व्यापार व्यवस्था में ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं, जिनके तहत कथित तौर पर ऐसी व्यापारिक गतिविधियों में शामिल साझेदारों पर कार्रवाई या दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
नवारो के बयान में भारत का उल्लेख ऐसे समय हुआ है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, आयात शुल्क और अन्य आर्थिक मुद्दों को लेकर पहले से चर्चा चल रही है। ऐसे में अमेरिकी सलाहकार की ताजा टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूसी तेल खरीद को लेकर भी भारत पर निशाना
पीटर नवारो ने भारत को लेकर केवल चीन से जुड़े कथित व्यापारिक नेटवर्क का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि रूसी तेल की खरीद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत और कुछ अन्य देश अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए नए शुल्क से बचने के लिए ऐसे नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
नवारो ने रूस से संबंधित प्रतिबंध विधेयक का हवाला देते हुए कहा कि लगातार रूसी तेल खरीदने वाले देशों को 100 प्रतिशत तक के शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। उनके दावे के अनुसार, इस संदर्भ में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम सामने आता है।
नवारो ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत की रूसी तेल व्यापार में भागीदारी तेजी से बढ़ी है। रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से भारत पर पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं और नवारो ने अपने ताजा बयान में इसी मुद्दे को फिर उठाया है।
पहले भी भारत को बता चुके हैं ‘टैरिफ का महाराजा’
पीटर नवारो भारत की व्यापार नीति को लेकर पहले भी तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। वह भारत को “टैरिफ का महाराजा” तक कह चुके हैं। उनके इस बयान की भारत में काफी आलोचना हुई थी।
नवारो की भारत संबंधी टिप्पणियों को लेकर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इस सप्ताह व्हाइट हाउस में अपने ऊपर हुई आलोचनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इंटरनेट पर भारतीय महाद्वीप की ओर से उन पर कई तरह के भद्दे हमले किए गए।
उन्होंने अपने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा, “ऐसा न करें। अमेरिका में हम समस्याओं को इस तरह से नहीं सुलझाते हैं।”
भारत और अमेरिका के व्यापार संबंधों पर बढ़ सकती है बहस
नवारो के ताजा बयान ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ अमेरिकी सलाहकार चीन के कथित शुल्क-परिहार नेटवर्क को लेकर भारत समेत 40 से अधिक देशों का नाम ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रूसी तेल खरीद को लेकर भी भारत पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अमेरिकी रिपोर्ट में भारत को कथित नेटवर्क का हिस्सा बताए जाने का दावा व्यापार नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। नवारो की ओर से यह चेतावनी भी दी गई है कि ट्रंप प्रशासन ऐसे देशों और व्यापारिक गतिविधियों पर सख्त प्रावधान लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
चीन के सामान और तीसरे देशों के रास्ते पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी सलाहकार के आरोपों का मुख्य केंद्र चीन से आने वाले सामान और उनके तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजार तक पहुंचने का मुद्दा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मामूली प्रसंस्करण, दोबारा लेबलिंग और पैकेजिंग बदलने जैसी गतिविधियों के जरिए उत्पादों की मूल पहचान बदलने की कोशिश की जाती है।
नवारो के मुताबिक, यदि किसी देश के जरिए चीन के सामान को अमेरिकी शुल्क से बचाने की कोशिश की जाती है, तो वह देश अमेरिकी व्यापार नीति के दायरे में आ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत को भी अमेरिकी प्रशासन के “रडार” पर होने की बात कही है।
