अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में अब दुनिया की नजरें हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर टिक गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर पूरा नियंत्रण है। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका इस नियंत्रण को बनाए रखेगा। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता तेल और गैस की सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है।

12 अगस्त को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका का हॉर्मुज पर ‘टोटल कंट्रोल’ है। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी और समुद्री नाकेबंदी का जिक्र करते हुए इसे एक तरह की “स्टील वॉल” बताया। ट्रंप का कहना था कि ईरान इस स्थिति को बदलने के लिए कुछ नहीं कर सकता।

इसके बाद 14-15 अगस्त के आसपास ट्रंप ने अपना बयान और आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि ईरान को हराने के बाद अमेरिका जल्द ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकता है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा पैदा कर दी है।

हालांकि, ट्रंप का यह कहना कि अमेरिका हॉर्मुज को अपना क्षेत्र बना देगा, अभी कोई वास्तविक कब्जा या कानूनी बदलाव नहीं है। यह फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से दिया गया राजनीतिक बयान और इरादा है।

ट्रंप के दावे को ईरान ने तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हॉर्मुज पर अमेरिका के नियंत्रण का दावा गलत है। ईरान का कहना है कि अमेरिका सिर्फ बयान देकर इस समुद्री रास्ते पर अपना अधिकार नहीं जमा सकता।

ईरान पहले ही हॉर्मुज को लेकर अपनी स्थिति साफ कर चुका है। तेहरान का कहना है कि इस रास्ते को खोलने और सामान्य जहाजों की आवाजाही बहाल करने का मामला अमेरिका के साथ चल रही बातचीत और युद्ध की स्थिति से जुड़ा हुआ है।

हॉर्मुज की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरती है। युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही पहले ही काफी कम हो चुकी है। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में चिंता बढ़ी है।

18 अगस्त की Reuters रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीद कमजोर होने के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई। Brent crude करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हॉर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या काफी कम हो गई है।


अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का अंतरिम समझौता 17 अगस्त को खत्म हो गया। इस समझौते का एक अहम हिस्सा हॉर्मुज में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सामान्य करना था, लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।

अब स्थिति यह है कि एक तरफ ट्रंप हॉर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कर रहे हैं, वहीं ईरान इसे मानने से साफ इनकार कर रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय फिलहाल बढ़ता दिखाई दे रहा है।

इस पूरे मामले का असर आगे सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रह सकता। अगर हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो तेल की कीमतें, शिपिंग लागत और दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है।