नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर सामने आई है। चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने स्पष्ट किया है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और आने वाले समय में खुदरा बाजार में इसकी कीमतों में नरमी आ सकती है। संगठन के मुताबिक हाल में कीमतों में आई तेजी के पीछे वास्तविक कमी से ज्यादा कुछ अन्य बाजार परिस्थितियां जिम्मेदार रही हैं।
कीमत बढ़ने के पीछे क्या है असली वजह?
24 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारणों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कीमतों में तेजी के पीछे कारोबारियों और थोक खरीदारों की ओर से की गई अनुमान आधारित अतिरिक्त खरीदारी यानी स्पेकुलेटिव बाइंग प्रमुख कारणों में शामिल है। इसके अलावा खराब मौसम की वजह से चीनी उत्पादन में आई कमी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
ISMA अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि चीनी मिलों ने बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने या एक्स-मिल कीमतों को बढ़ाने में कोई भूमिका नहीं निभाई है। संगठन का कहना है कि मौजूदा स्थिति को देश में चीनी की वास्तविक कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार के फैसले के बाद बाजार में कम होने लगा दबाव
ISMA के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने के बाद बाजार में कीमतों का दबाव कम होना शुरू हो गया है। संगठन का कहना है कि आयात की अनुमति से घरेलू बाजार में आपूर्ति को मजबूती मिलेगी और इससे चीनी की उपलब्धता को लेकर बनी चिंता कम होगी।
ISMA के अध्यक्ष के मुताबिक भारत में फिलहाल चीनी की कमी जैसी स्थिति नहीं है। सितंबर 2026 के अंत तक देश में लगभग 35 लाख टन चीनी का अंतिम स्टॉक रहने का अनुमान है। इस मात्रा को घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। संगठन का मानना है कि पर्याप्त स्टॉक और बेहतर होती आपूर्ति के कारण आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।
अक्टूबर से शुरू होगी नई पेराई, बाजार को मिलेगा बड़ा सहारा
चीनी की कीमतों पर दबाव कम करने में नई पेराई का मौसम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ISMA के अनुसार, देश में चीनी मिलों का नया संचालन लगभग 15 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। नई पेराई शुरू होने के साथ ही घरेलू बाजार में चीनी की नई आपूर्ति आने लगेगी।
अक्टूबर महीने में चीनी मिलों से लगभग 10 से 12 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है। वहीं, इसी अवधि में देश में चीनी की खपत करीब 24 से 25 लाख टन रहने की उम्मीद है। यानी शुरुआती दौर में मासिक उत्पादन और खपत के बीच अंतर बना रह सकता है। हालांकि मौजूदा स्टॉक और शुल्क-मुक्त आयात के जरिए इस अंतर को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
सितंबर के बाद क्या चीनी के दाम सच में नीचे आएंगे?
चीनी की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में वास्तव में राहत मिलेगी। ISMA का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और नई पेराई शुरू होने के बाद आपूर्ति में और सुधार होगा। ऐसे में खुदरा बाजार में कीमतों के नरम पड़ने की संभावना बनती है।
हालांकि, कीमतों में कितनी गिरावट आएगी, इसे लेकर कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया गया है। वास्तविक खुदरा कीमतें घरेलू उत्पादन, बाजार की मांग, आयातित चीनी की उपलब्धता और कारोबारियों की खरीदारी जैसे कई कारकों पर निर्भर करेंगी।
आम लोगों की रसोई पर क्यों पड़ता है चीनी की कीमत का असर?
चीनी की कीमत में बदलाव का प्रभाव केवल चाय या घरेलू इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहता। मिठाई, बेकरी उत्पाद और चीनी का इस्तेमाल करने वाले कई खाद्य उत्पादों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि चीनी के दाम बढ़ने या घटने का सीधा संबंध आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट से जुड़ जाता है।
हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में तेजी के कारण उपभोक्ताओं को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ISMA का यह दावा महत्वपूर्ण है कि देश में चीनी की कमी नहीं है और आने वाले समय में आपूर्ति बेहतर होने पर खुदरा बाजार में राहत मिल सकती है।
घबराकर महंगी चीनी खरीदने की जरूरत नहीं?
ISMA ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह संदेश दिया है कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है। सितंबर के अंत तक लगभग 35 लाख टन अंतिम स्टॉक रहने का अनुमान, 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति और अक्टूबर से नई पेराई शुरू होने की संभावना बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं।
संगठन के अनुसार, हालिया तेजी को चीनी की वास्तविक कमी से जोड़ना उचित नहीं होगा। कारोबारियों और थोक खरीदारों की अनुमान आधारित खरीदारी तथा खराब मौसम के कारण उत्पादन में कमी ने कीमतों को प्रभावित किया है। अब आयात और आगामी उत्पादन से आपूर्ति की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
चीनी की कीमतों पर आगे किन बातों की रहेगी नजर?
आने वाले समय में चीनी की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से घरेलू स्टॉक, आयातित चीनी की उपलब्धता, नई पेराई से होने वाले उत्पादन और बाजार की मांग पर निर्भर करेगी। अक्टूबर में 10 से 12 लाख टन उत्पादन का अनुमान है, जबकि खपत 24 से 25 लाख टन के आसपास रहने की उम्मीद है। ऐसे में मौजूदा स्टॉक और आयात की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
ISMA के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में देश में चीनी की आपूर्ति को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। संगठन का मानना है कि जैसे-जैसे बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी, कीमतों पर बना दबाव कम हो सकता है और खुदरा उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
