तत्काल टिकट टेंपरिंग और अंतरराज्यीय दलाल नेटवर्क से जुड़े मामले की जांच अब बिहार की सीमाओं से बाहर भी पहुंचेगी। हाजीपुर में टेंपरिंग किए गए तत्काल आरक्षण टिकट के साथ आठ लोगों की गिरफ्तारी और समस्तीपुर मंडल में सामने आए नए खुलासे के बाद रेल पुलिस ने दूसरे राज्यों तक जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
Tatkal Ticket Scam: स्टेशनों के नाम मिटाकर टिकटों की हेराफेरी, बिहार से तेलंगाना और MP तक होगी जांचSource : NDtv.com
फिलहाल रेल पुलिस की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश का इंतजार कर रही है। आदेश मिलते ही जांच दल तेलंगाना, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत उन राज्यों के लिए रवाना होगा, जहां से जारी किए गए तत्काल टिकटों में कथित तौर पर टेंपरिंग कर हेराफेरी की गई थी।
दूसरे राज्यों के रेलवे काउंटर से जारी हुए थे तत्काल टिकट
जांच में अब तक सामने आया है कि बिहार में बरामद कई तत्काल टिकट दूसरे राज्यों के रेलवे काउंटरों से जारी किए गए थे। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि टिकटों पर दर्ज स्टेशन कोड और अन्य पहचान संबंधी जानकारी में छेड़छाड़ कर असली स्टेशन की पहचान छिपाने की कोशिश की गई।
कुछ टिकटों से तो स्टेशन का नाम ही हटा दिया गया, ताकि यह पता न चल सके कि टिकट किस रेलवे काउंटर से जारी हुआ था। हालांकि, शुरुआती जांच में इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद अब रेल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गई है और मामले में शामिल लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।
सीसीटीवी फुटेज और बुकिंग रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे
रेल पुलिस के मुताबिक, तेलंगाना के सिद्धपेट और पूर्णा स्टेशन से जारी तत्काल टिकट जांच के दायरे में हैं। जांच टीम इन स्टेशनों के आरक्षण काउंटर पर तैनात बुकिंग क्लर्कों से पूछताछ करेगी और यह पता लगाएगी कि टिकट वास्तविक यात्रियों के लिए जारी किए गए थे या फिर दलालों के जरिए अवैध तरीके से बुक कराए गए।
इसके अलावा, टिकट जारी होने के समय ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, बुकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
आम यात्रियों को उठाना पड़ रहा नुकसान
समस्तीपुर में चार और हाजीपुर में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को इस फर्जीवाड़े के पीछे अंतरराज्यीय दलाल नेटवर्क होने के संकेत मिले हैं। अब यह भी जांच की जा रही है कि कहीं रेलवे के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से तो बड़े पैमाने पर तत्काल टिकट दलालों तक नहीं पहुंचाए जा रहे थे।
अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच दूसरे राज्यों तक पहुंचेगी, इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। इस गोरखधंधे का सबसे बड़ा खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। बुकिंग शुरू होते ही तत्काल टिकट खत्म हो जाते हैं, जिसके बाद जरूरतमंद लोगों को दलालों से कई गुना ज्यादा कीमत चुकाकर टिकट खरीदने पड़ते हैं। रेल पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होने तक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
