सांकेतिक तस्वीर (AI IMAGE) Source : NBT
मेरठ: आयकर विभाग ने देशव्यापी स्तर पर फैले टैक्स रिफंड धोखाधड़ी के एक ऐसे सनसनीखेज रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके तार मेरठ की एक तंग झुग्गी से जुड़े हैं। विभाग की जांच विंग ने महज 225 स्क्वायर फीट (करीब 25 वर्ग गज) के एक छोटे से मकान से संचालित हो रहे इस महाघोटाले को पकड़ा है। इस पूरे सिंडिकेट की मास्टरमाइंड 30 साल की एक महिला नैंसी अग्रवाल है। आरोप है कि इस महिला ने अकेले अपने दम पर करीब ₹357 करोड़ रुपये का फर्जी टैक्स रिटर्न टर्नओवर दिखाया और देशभर के 3,000 से अधिक वेतनभोगी क्लाइंट्स के खातों में ₹65.5 करोड़ का अवैध टैक्स रिफंड ट्रांसफर करवा दिया।
225 स्क्वायर फीट के कमरे से अरबों का फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला इसलिए बेहद हैरान करने वाला है क्योंकि जिस स्तर के वित्तीय अपराध को कॉर्पोरेट दफ्तरों से अंजाम दिया जाता है, उसे नैंसी ने अपने माता-पिता और छोटे भाई के साथ रहते हुए इंडस्ट्रियल एरिया के एक मामूली से घर से अंजाम दिया। आरोपी महिला के पास कोई बड़ी डिग्री या सीए (CA) का बैकअप नहीं था। उसने पिछले तीन सालों के दौरान एक छोटी सी निजी फर्म में अकाउंटेंट के तौर पर काम किया था। इसी नौकरी के दौरान उसने टैक्स फाइलिंग पोर्टल, प्रोसेसिंग सिस्टम की बारीकियों और उसकी तकनीकी कमियों को बहुत गहराई से समझा। इसके बाद उसने केवल एक लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन के सहारे पूरे देश में अपना नेटवर्क फैला दिया।
धारा 80GGC का हथियार और 'रेफरल' का जाल
आयकर विभाग की शुरुआती जांच के अनुसार, नैंसी अग्रवाल के इस फर्जीवाड़े का मुख्य हथियार आयकर अधिनियम की धारा 80GGC (Section 80GGC) थी। यह धारा राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदे (Donations) पर करदाताओं को 100% टैक्स छूट का लाभ देती है। आरोपी महिला ने इसी का फायदा उठाया और देश के कुछ गैर-मान्यता प्राप्त व निष्क्रिय राजनीतिक दलों के नाम पर फर्जी चंदे की रसीदें तैयार कीं। वह अपने क्लाइंट्स (जिनमें ज्यादातर बड़े शहरों के कॉर्पोरेट कर्मचारी शामिल हैं) के आईटीआर में इस फर्जी डोनेशन को क्लेम के रूप में दिखा देती थी, जिससे उनका टैक्स सीधे रिफंड में बदल जाता था। अपने इस अवैध धंधे को तेजी से बढ़ाने के लिए उसने एक 'रेफरल डिस्काउंट' स्कीम भी चलाई, जिसके तहत जो पुराना ग्राहक नया ग्राहक लाता था, उसे कमीशन या फीस में बड़ी छूट दी जाती थी।
आयकर विभाग की रेड में करोड़ों की संपत्ति बरामद
आयकर विभाग की मेरठ विंग को जब डेटा एनालिटिक्स और एआई-बेस्ड टूल्स के जरिए एक ही जगह से संदिग्ध और भारी-भरकम रिफंड क्लेम होने का इनपुट मिला, तो विभाग ने जाल बिछाया। महिला के घर और संदिग्ध ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान विभाग के अधिकारी भी दंग रह गए। वहां से करीब ₹4 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), ₹50 लाख रुपये से अधिक के सोने के आभूषण, ₹5 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में डिजिटल दस्तावेज, लैपटॉप तथा फर्जी बही-खाते बरामद किए गए। जांच टीम ने इन सभी संपत्तियों और बैंक खातों को तुरंत प्रभाव से सीज कर दिया है।
3,000 करदाताओं पर गिरेगी गाज, रिकवरी की तैयारी
इस रैकेट के भंडाफोड़ होने के बाद अब उन 3,000 से अधिक टैक्सपेयर्स की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, जिन्होंने शॉर्टकट से रिफंड पाने के चक्कर में इस महिला की सेवाएं ली थीं। आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, इन सभी करदाताओं की पहचान कर ली गई है, जिनमें दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों के कई नामी कंपनियों के सैलरीड एम्प्लॉइज शामिल हैं। विभाग इन सभी को धारा 148 या री-असेसमेंट के तहत नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। इन सभी से अवैध रूप से लिए गए ₹65.5 करोड़ के रिफंड की वसूली भारी जुर्माने और ब्याज के साथ की जाएगी। इसके अलावा मुख्य आरोपी नैंसी अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जा रहा है।
