पटना । बिहार में स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पटना में नए इकोसिस्टम की जमीन तैयार की जा रही है। विश्व उद्यमी दिवस के मौके पर जिला प्रशासन की ओर से यूथ कनेक्ट कार्यक्रम के तहत समाहरणालय में आयोजित ‘स्टार्टअप पटना’ कार्यशाला में 100 से अधिक युवा और उद्यमी जुटे। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे सफल स्टार्टअप संचालकों ने अपने कारोबार, नवाचार और सफलता की यात्रा साझा की। इस दौरान यह भी सामने आया कि बिहार में स्टार्टअप की तस्वीर अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों से भी उद्यमिता की नई कहानियां सामने आ रही हैं।

कार्यशाला में जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने उद्यमियों से संवाद किया और स्टार्टअप के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जो देश स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे हैं, वे समृद्धि की राह में भी आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के गांवों में भी कई लोग स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार मदद के लिए तैयार है।

कार्यशाला में उद्यमियों ने बताया कि नई सोच, आधुनिक तकनीक और नवाचार के जरिए न केवल मुश्किल कामों को आसान बनाया जा सकता है, बल्कि कम लागत में बेहतर सेवाएं तैयार कर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। उद्यमियों ने अपने स्टार्टअप के उत्पाद और सेवाओं का प्रदर्शन भी किया।


जूते और बैग की सफाई से लेकर रोबोटिक्स तक

कार्यशाला में साजिया कैसर ने रिवाइवल शू लॉन्ड्री प्राइवेट लिमिटेड का प्रस्तुतीकरण किया। उनका स्टार्टअप बिहार में अपनी तरह की अभिनव शू लॉन्ड्री के रूप में काम कर रहा है। यहां आधुनिक तकनीक से जूतों की सफाई और रिपेयरिंग के साथ बैग की सफाई एवं नवीनीकरण किया जाता है।

वहीं, दक्षिण कोरिया से बिहार आकर स्टार्टअप शुरू करने वाले विभूति विक्रमादित्य ने स्मार्टवे इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड की जानकारी दी। उनका स्टार्टअप मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ आईसीयू मरीजों की निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस काम में बिहार सरकार से उन्हें काफी मदद मिली।

साधना झा ने अंकुरम रोबो प्राइवेट लिमिटेड के जरिए रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और इससे जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर आधारित कारोबार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 25 लाख रुपये से शुरू किया गया उनका व्यवसाय अब सालाना 1.10 करोड़ रुपये की आय तक पहुंच गया है।


ड्रोन से एयरोस्पेस तक, 22 राज्यों में पहुंचा कारोबार

मनीष दीक्षित ने वेमानिका एयरोस्पेस के माध्यम से एयरोस्पेस और ड्रोन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी। उनका स्टार्टअप सर्विलांस, वीडियो सर्विलांस, वीडियोग्राफी और संचार से जुड़े क्षेत्रों में भी काम करता है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने महज दो महीने के अंदर उन्हें स्टार्टअप फंड उपलब्ध कराया। वर्ष 2022 में शुरू हुआ उनका स्टार्टअप अब 22 राज्यों तक पहुंच चुका है। इस वर्ष 52 करोड़ रुपये का राजस्व आने की जानकारी उन्होंने दी।

इसी तरह शुभम शशांक ने क्लाउड स्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के बारे में बताया। उनके स्टार्टअप में एक किट के जरिए 180 तरह के ब्लड टेस्ट किए जाने की सुविधा विकसित की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में 22 लाख रुपये से शुरू हुआ कारोबार इस साल 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।


कृषि उत्पादों से हेल्थ टेस्टिंग तक स्टार्टअप

मनीष सिंह ने बृहत्ती नेचुरल फूड प्राइवेट लिमिटेड के जरिए कृषि और प्राकृतिक उत्पादों के क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी। स्टार्टअप में ब्लू टी, ग्रीन टी, विभिन्न प्रकार के बीज, मखाना, खीर समेत कई प्राकृतिक और कृषि आधारित उत्पादों पर काम किया जा रहा है।

वहीं डॉ. अजय ने कोग्नोस्मेड लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड के काम के बारे में बताया। उनका स्टार्टअप स्वास्थ्य संबंधी जांच के साथ वाटर टेस्टिंग, फूड टेस्टिंग और आयुष मेडिसिन टेस्टिंग जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने के क्षेत्र में काम कर रहा है।

6 हजार रुपये की आमदनी से 5-6 लाख रुपये महीना तक पहुंचा परिवार

कार्यशाला में बिहटा प्रखंड के परेव गांव की जीविका दीदी संजू देवी की कहानी भी चर्चा में रही। उन्होंने बताया कि जीविका के सहयोग से ऋण लेकर उन्होंने बर्तन बनाने का काम शुरू किया। कभी उनके परिवार की मासिक आय करीब 6 हजार रुपये थी, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ अब परिवार की आमदनी 5 से 6 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई है।

कार्यशाला में इनके अलावा कई अन्य उद्यमियों ने भी अपने स्टार्टअप की यात्रा और काम के बारे में जानकारी दी। उद्यमियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से मिल रहे सहयोग की सराहना की और कहा कि ऐसे मंच नए उद्यमियों को सफल लोगों से सीखने और अपने विचारों को आगे बढ़ाने का अवसर देते हैं।


NOC से लेकर प्रशासनिक मदद तक, सहयोग का भरोसा

जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने नए स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं और उद्यमियों को भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी उद्यमी को किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) या अन्य प्रशासनिक सहयोग की जरूरत होगी तो जिला प्रशासन उनकी सहायता करेगा।

उन्होंने कहा कि युवाओं में प्रतिभा, ऊर्जा और नई सोच की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें उचित मार्गदर्शन, अवसर और ऐसा वातावरण देने की है, जिसमें वे अपने विचारों को जमीन पर उतार सकें। ‘स्टार्टअप पटना’ का लक्ष्य पटना में ऐसा मजबूत और सहयोगात्मक इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां युवा अपने अभिनव विचारों को व्यावहारिक रूप देकर सफल उद्यम में बदल सकें।


कार्यशाला में सफल उद्यमियों ने युवाओं को रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि सरकार और प्रशासन से सहयोग तथा मार्गदर्शन मिलने पर बिहार के युवाओं के नए विचारों को बड़े कारोबार में बदला जा सकता है। जिला प्रशासन का यूथ कनेक्ट कार्यक्रम इसी तरह युवाओं को नवाचार का मंच देने, सफल उद्यमियों से जोड़ने और पटना में स्टार्टअप के लिए मजबूत वातावरण तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।