
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान आज भले ही मुंबई के आलीशान बंगले 'मन्नत' में रहते हों और दुनिया के सबसे अमीर अभिनेताओं में शुमार हों, लेकिन उनका दिल आज भी दिल्ली की तंग गलियों और पुरानी यादों में धड़कता है। शाहरुख खान अक्सर अपनी व्यस्त शूटिंग शेड्यूल या इवेंट्स के सिलसिले में दिल्ली आते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली की इस धरती पर कदम रखते ही, कैमरों की चमक और वीआईपी सुरक्षा के बीच से निकलकर किंग खान एक ऐसा काम करना कभी नहीं भूलते, जो उनके बेहद करीब है?
यह एक ऐसी आदत है जो उनके किसी स्टारडम से नहीं, बल्कि एक बेटे के अपने माता-पिता के प्रति कभी न खत्म होने वाले अटूट प्यार से जुड़ी है।
शाहरुख खान जब भी दिल्ली आते हैं, तो वह देर रात या सुबह के सन्नाटे में चुपके से दिल्ली के कब्रिस्तान जाते हैं। यहां उनके दिवंगत पिता मीर ताज मोहम्मद खान और मां लतीफ फातिमा खान की कब्रें हैं।
जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब बॉलीवुड का यह सबसे बड़ा सुपरस्टार अपने सिर को ढककर, बेहद साधारण सफेद शर्ट और काली पैंट में अपने माता-पिता की कब्र के सामने घुटनों के बल बैठ जाता है। वह वहां घंटो दुआ मांगते हैं, कब्र की साफ-सफाई करते हैं और अपने दिल की बातें साझा करते हैं।
"मैं जितना भी दिल्ली छोड़ना चाहूं, दिल्ली मुझे नहीं छोड़ सकती, क्योंकि मेरे माता-पिता यहीं सो रहे हैं।"
शाहरुख खान ने कई बार खुलकर यह दर्द बयां किया है कि उन्हें अपने माता-पिता के साथ पर्याप्त समय बिताने का मौका नहीं मिला। यही वजह है कि उन्होंने एक बार इंटरनेशनल टॉक शो (डेविड लेटरमैन शो) में कहा था कि वह खुद बहुत लंबी जिंदगी जीना चाहते हैं ताकि उनके बच्चों (आर्यन, सुहाना और अबराम) को कभी वो अधूरापन न देखना पड़े जो उन्होंने झेला।
सोशल मीडिया पर जब भी शाहरुख खान की कब्रिस्तान में दुआ मांगते हुए तस्वीरें सामने आती हैं, तो फैंस का दिल भर आता है। प्रशंसकों के भावुक होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि जो इंसान दुनिया के सामने 'किंग खान' है, जिसके एक इशारे पर लाखों लोग दीवाने हो जाते हैं, वह अपने माता-पिता के सामने आज भी वही 15-26 साल का छोटा बच्चा बन जाता है।
अभिनेता ने एक बार भावुक होते हुए कहा था कि फिल्मों में आना और एक्टिंग करना उनके लिए सिर्फ एक करियर नहीं था, बल्कि अपने माता-पिता को खोने के गम और अकेलेपन को बाहर निकालने का एक जरिया (Venting Place) था। उन्हें लगता है कि उनकी मां और पिता ऊपर आसमान से आज भी उनकी फिल्में देखते हैं और उन पर गर्व करते हैं।
