मआज़ ख़ान
35वीं पुण्यतिथि पर विशेष
आज 21 मई है। 35 साल पहले इसी दिन भारत ने अपना सबसे युवा प्रधानमंत्री खो दिया था। लेकिन राजीव गाँधी सिर्फ एक नाम नहीं, एक विज़न थे। वो विज़न जिसने भारत को बैलगाड़ी के युग से सीधे कंप्यूटर युग में ला खड़ा किया।
जब दुनिया शक कर रही थी, राजीव ने भरोसा किया
1980 का दशक। भारत में कंप्यूटर को "बेरोजगारी की मशीन" कहा जाता था। सरकारी दफ्तरों में बाबू फाइलों का अंबार लिए बैठे थे। बैंकों में पैसा निकालने के लिए 2 घंटे लाइन लगती थी। ऐसे में 40 साल का एक युवा प्रधानमंत्री आया और बोला - "हमें 21वीं सदी में जाना है"। लोग हँसे। विपक्ष ने मजाक उड़ाया। पर राजीव अड़े रहे।
1. ATM: जेब में बैंक लेकर घूमने की आजादी
आज आप रात के 2 बजे ATM से पैसा निकालते हैं तो एक बार राजीव गाँधी को धन्यवाद जरूर दीजिए। 1987 में पहला ATM लाने का फैसला राजीव सरकार ने किया। उस समय कहा गया - "भारत में ATM कौन चलाएगा?" आज 2.5 लाख से ज्यादा ATM हैं। राजीव ने ही बैंकिंग को आम आदमी की पहुँच में ला दिया।
2. कंप्यूटर क्रांति: "ड्राइंग रूम से क्लासरूम तक"
राजीव गाँधी ने सैम पित्रोदा के साथ मिलकर C-DOT और टेलीकॉम मिशन शुरू किया। STD-PCO बूथ हर गली में लगे। कंप्यूटर पर इंपोर्ट ड्यूटी 125% से घटाकर 15% कर दी। नतीजा? जो कंप्यूटर 5 लाख का था, वो 50 हजार का हो गया। स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन शुरू हुई। उसी का नतीजा है कि आज भारत IT सुपरपावर है।
3. पंचायती राज का कंप्यूटरीकरण
राजीव का मानना था - "जब तक गाँव में तकनीक नहीं पहुँचेगी, भारत आगे नहीं बढ़ेगा"। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं को कंप्यूटर से जोड़ने का सपना देखा। आज डिजिटल इंडिया उसी सपने की अगली कड़ी है।
4. विज्ञान को मिली उड़ान
1986 में नई शिक्षा नीति, IIT का विस्तार, MTNL-VSNL की स्थापना। राजीव ने ही मोबाइल फोन और इंटरनेट के लिए रास्ता साफ किया। वो कहते थे - "मुझे ऐसा भारत चाहिए जहाँ सबसे गरीब आदमी भी तकनीक का इस्तेमाल कर सके।"
विरासत जो आज भी जिंदा है
UPI से 1 सेकंड में पेमेंट, डिजिलॉकर में मार्कशीट, कोविन पर वैक्सीन बुकिंग... ये सब उस बुनियाद पर खड़ा है जो 1984-89 में रखी गई थी। राजीव गाँधी ने सिर्फ सरकार नहीं चलाई, उन्होंने देश का माइंडसेट बदला।
आज जब हम "AI इंडिया" और "सेमीकंडक्टर मिशन" की बात करते हैं, तो याद रखना होगा कि पहला क्लिक राजीव ने किया था। उन्होंने हमें सिखाया कि तकनीक डरने की नहीं, अपनाने की चीज है।
35वीं पुण्यतिथि पर बस इतना ही कह सकते हैं कि राजीव गाँधी ने हमें बैलगाड़ी से बुलेट ट्रेन का सपना दिखाया। वो सपना आज भी अधूरा है, पर रास्ता वही है जो उन्होंने दिखाया था - "युवा सोच, तकनीकी अप्रोच"।
