नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से आयोजित राष्ट्रीय समारोह में एक बार फिर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई। लगातार दूसरे वर्ष दोनों नेताओं के समारोह में शामिल नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार रक्षा मंत्रालय की ओर से दोनों नेताओं को कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन वे समारोह में नहीं पहुंचे। हालांकि कांग्रेस की ओर से अनुपस्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे वर्ष 2024 में हुए सीटिंग विवाद से जोड़कर देख रहे हैं।
दो साल पुराना विवाद फिर क्यों आया चर्चा में?
वर्ष 2024 का स्वतंत्रता दिवस समारोह उस समय विवादों में आ गया था, जब राहुल गांधी हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने थे। समारोह में उन्हें पांचवीं पंक्ति में बैठाया गया था, जिस पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
पार्टी का आरोप था कि नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया गया और बैठने की व्यवस्था पद की गरिमा के अनुरूप नहीं थी। इस मुद्दे ने उस समय राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।
रक्षा मंत्रालय ने क्या दिया था स्पष्टीकरण?
सीटिंग व्यवस्था को लेकर उठे विवाद के बाद रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा निर्धारित ‘टेबल ऑफ प्रिसीडेंस’ के अनुसार की जाती है।
मंत्रालय के अनुसार उस वर्ष ओलंपिक पदक विजेताओं और खिलाड़ियों को विशेष सम्मान देते हुए अग्रिम पंक्तियों में स्थान दिया गया था, जिसके कारण बैठने के क्रम में परिवर्तन हुआ। सरकार ने इसे पूरी तरह प्रोटोकॉल आधारित व्यवस्था बताया था।
नेता प्रतिपक्ष की सीट कैसे तय होती है?
राष्ट्रपति सचिवालय के नियमों के अनुसार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष माना जाता है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों में बैठने की व्यवस्था भी इसी संवैधानिक प्रोटोकॉल और वरीयता क्रम के आधार पर निर्धारित की जाती है।
यही कारण है कि हर वर्ष विभिन्न संवैधानिक पदों, मंत्रियों, न्यायपालिका, सैन्य अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों की सीटें निर्धारित नियमों के अनुरूप तय की जाती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण में विपक्ष पर साधा निशाना
स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना किसी दल या नेता का नाम लिए विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की प्रगति देख नहीं सकते और निराशा फैलाकर देशवासियों को गुमराह करने का प्रयास करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास मजबूत लोकतंत्र, संविधान और जनशक्ति है, जिसके बल पर देश नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि उनका सपना है कि ऐसे एक लाख युवा सार्वजनिक जीवन में आएं, जिनके परिवार का पहले राजनीति से कोई संबंध न रहा हो। इससे लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा।
अनुपस्थिति ने फिर बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की लगातार दूसरी बार अनुपस्थिति ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। एक ओर सरकार इसे प्रोटोकॉल आधारित आयोजन मानती रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष के पुराने आरोप और 2024 का सीटिंग विवाद आज भी इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में बनाए हुए हैं।
