
Source: TV9 Bharatvarsh
पुणे के पास पिंपरी-चिंचवाड़ के मोशी कचरा डिपो में बुधवार को हुए दर्दनाक हादसा हुआ है। जो पिछले चार दिनों से चल रहा बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरकार रविवार को खत्म हो गया। करीब 83 घंटे तक चले इस मुश्किल अभियान में बचाव दल ने आखिरी लापता कर्मचारी का शव बरामद किया। इसके साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है।
रविवार रात करीब एक बजे मलबे से निकाले गए आखिरी कर्मचारी की पहचान वामन कस्बे के रूप में हुई। शव को पोस्टमार्टम के लिए पिंपरी के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल भेज दिया गया। पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि अब मलबे में दबे सभी 23 लोगों का पता लगा लिया गया है और इसी के साथ बचाव अभियान को समाप्त कर दिया गया है।
यह हादसा बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे मोशी कचरा डिपो में बने वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में हुआ था। यहां स्थित प्रशासनिक कार्यालय की तीन मंजिला इमारत पर अचानक कचरे का एक बहुत बड़ा ढेर आ गिरा। कचरे का दबाव इतना ज्यादा था कि कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत ढह गई। हादसे के समय इमारत की पहली मंजिल पर बनी कैंटीन में कई कर्मचारी दोपहर का खाना खा रहे थे। किसी को कुछ समझ आता, उससे पहले ही इमारत टूटने लगी। मौके पर मौजूद पांच कर्मचारी किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन बाकी लोग मलबे के नीचे दब गए। इस हादसे में कुल 23 लोग फंस गए थे। बचाव दल ने कई घंटों की मेहनत के बाद 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन नौ लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
सेना, एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पीएमआरडीए फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम की आपदा प्रबंधन टीमों को मौके पर लगाया गया।
मलबा हटाने के लिए जेसीबी, एक्सकेवेटर, क्रेन और अत्याधुनिक डिमोलिशन मशीनों का इस्तेमाल किया गया। बचाव दल को सबसे ज्यादा परेशानी कचरे के नीचे बनने वाली जहरीली गैसों और अस्थिर मलबे से हुई। अधिकारियों ने बताया कि कचरे के ढेर से लगातार मीथेन और दूसरी जहरीली गैसें निकल रही थीं।
तीन दिनों की भारी बारिश को बताया जा रहा हादसे की वजह
प्रशासन का कहना है कि पिछले तीन दिनों में इलाके में 650 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई थी। लगातार हुई बारिश का पानी कचरे के बड़े ढेर के अंदर तक पहुंच गया था। इससे कचरे के नीचे मौजूद मीथेन और दूसरी गैसों का दबाव बढ़ गया।
अधिकारियों के मुताबिक, इसी वजह से कचरे का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया और सीधे प्रशासनिक भवन पर गिर गया । देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में बदल गई। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ बारिश को हादसे की वजह मान लेना सही नहीं होगा।
कचरा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
करीब 81 एकड़ में फैले मोशी कचरा डिपो में हुए इस हादसे के बाद कचरा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस तरह के संवेदनशील इलाके में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बेहतर इंतजाम होने चाहिए थे। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या कचरे के ढेर की नियमित जांच की जाती थी और क्या वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जरूरी नियमों का पालन किया जा रहा था।
फिलहाल प्रशासन ने इस घटना को प्राकृतिक आपदा बताया है, लेकिन पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसे के पीछे सिर्फ भारी बारिश जिम्मेदार थी या फिर कहीं न कहीं लापरवाही भी हुई थी।
