नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच जन सुराज के नेता और बिहार के बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए हैं। किशोर ने दावा किया कि राजीव कुमार के कार्यकाल में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर ऐसे ही सवाल उठते थे और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें निजी क्षेत्र के बड़े बैंक एचडीएफसी का चेयरमैन बना दिया गया।
उनके इस बयान ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रशांत किशोर की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब विपक्षी गठबंधन इंडिया (INDIA) मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। बिहार में विधान परिषद की सीटों के लिए चुनावी गतिविधियां भी तेज हैं। राजीव कुमार वर्ष 2025 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
राजीव कुमार के कार्यकाल को लेकर प्रशांत किशोर ने क्या कहा?
प्रशांत किशोर ने गुरुवार को अपने बयान में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार से पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने राजीव कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद एचडीएफसी बैंक में चेयरमैन की जिम्मेदारी मिलने का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर चिंता जताई। किशोर के मुताबिक, चुनाव आयोग की छवि पर सवाल किसी एक अधिकारी या एक घटना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पिछले सात से आठ वर्षों के दौरान लगातार ऐसी परिस्थितियां बनी हैं, जिनसे संस्था की निष्पक्षता को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा हुआ है। हालांकि, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त के संबंध में प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR से लेकर मतगणना तक, चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
प्रशांत किशोर ने विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के अलावा चुनाव प्रक्रिया के कई पहलुओं पर सवाल उठाए। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव की समय-सारणी निर्धारित करने और आदर्श आचार संहिता लागू कराने के तरीके पर आपत्ति जताई। उन्होंने बिहार में मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये दिए जाने के आरोपों और मतगणना में कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया। किशोर का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में सत्तारूढ़ दल को अनुचित लाभ मिलने की धारणा मजबूत हुई है। उनके बयान का मुख्य आधार यह है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग की निष्पक्षता के साथ-साथ उसकी निष्पक्षता पर जनता का भरोसा भी जरूरी है। हालांकि, उनके द्वारा उठाए गए सभी आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के साक्ष्य और आधिकारिक रिकॉर्ड का अलग-अलग परीक्षण आवश्यक है।
चुनाव आयोग में सुधार के लिए रखीं पांच प्रमुख मांगें
प्रशांत किशोर ने केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि चुनाव व्यवस्था में संस्थागत सुधारों की जरूरत भी बताई। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में बदलाव की मांग की। उनकी प्रमुख मांगों में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार, मतदाता सूची बनाने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी करना, मतगणना से पहले फॉर्म 17 को सार्वजनिक करना और मतगणना की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना शामिल है। किशोर का कहना है कि इन बदलावों से चुनाव प्रक्रिया पर जनता का विश्वास मजबूत हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा विवाद को केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित रखने के बजाय चुनाव आयोग की व्यवस्था में सुधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
बिहार विधान परिषद चुनाव में जन सुराज की भी परीक्षा
बिहार में पटना स्नातक और पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों सहित विधान परिषद की सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। प्रशांत किशोर दावा कर चुके हैं कि इन दोनों सीटों पर उनकी पार्टी के उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे। जन सुराज पार्टी सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है। प्रस्तुत समाचार के अनुसार, इन चुनावों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। किशोर ने इससे पहले कहा था कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में पढ़े-लिखे मतदाता मतदान करते हैं और उन्हें उम्मीद है कि मतदाता पैसों के बदले अपना वोट नहीं बेचेंगे। उन्होंने बांकीपुर को बिहार में बदलाव की शुरुआत बताते हुए कहा कि इस बदलाव को मजबूत करने की जिम्मेदारी मतदाताओं की है। इन चुनावों के नतीजे राज्य में जन सुराज के राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा का विषय बन सकते हैं।
INDIA गठबंधन की मांग और चुनावी व्यवस्था पर जारी बहस
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन इंडिया लगातार प्रदर्शन कर रहा है। विपक्ष की मांगों में एसआईआर की प्रक्रिया पर रोक लगाने का मुद्दा भी शामिल है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाई है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने भी 10 अक्टूबर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। ऐसे में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मतगणना की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं। प्रशांत किशोर के ताजा बयान ने इस बहस में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के कार्यकाल और सेवानिवृत्ति के बाद मिली जिम्मेदारी का मुद्दा भी जोड़ दिया है। अब इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, नियुक्ति प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों पर राजनीतिक दलों तथा संबंधित संस्थाओं के रुख पर नजर रहेगी।
