भारत में डिजिटल भुगतान की सबसे लोकप्रिय व्यवस्थाओं में शामिल यूपीआई को लेकर एक नए सर्वे ने भविष्य के भुगतान व्यवहार पर बड़ा संकेत दिया है। लोकलसर्किल्स के सर्वे के मुताबिक, यदि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ ग्राहकों तक पहुंचता है, तो बड़ी संख्या में लोग भुगतान का दूसरा माध्यम अपना सकते हैं। सर्वे में 291 जिलों के 67 हजार से अधिक यूपीआई उपयोगकर्ताओं की राय शामिल की गई है।
शुल्क लगा तो यूपीआई छोड़ने का विकल्प चुन सकते हैं यूजर्स
सर्वे के अनुसार, यदि दुकानदार या व्यापारी यूपीआई भुगतान पर अलग से शुल्क वसूलते हैं तो केवल 14 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो शुल्क देने के बावजूद यूपीआई से भुगतान जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं 27 प्रतिशत लोग नकद भुगतान, 26 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड और 14 प्रतिशत डेबिट कार्ड का विकल्प चुनने की बात कह रहे हैं।
इसके अलावा 4 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, एनईएफटी या आईएमपीएस का इस्तेमाल कर सकते हैं। करीब 9 प्रतिशत लोग ऐसा दूसरा भुगतान विकल्प मांग सकते हैं, जिस पर कोई अतिरिक्त शुल्क न लगे। 2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ऐसी स्थिति में खरीदारी ही टाल सकते हैं।
2 हजार रुपये से ज्यादा के भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी घटने का अनुमान
सर्वे में खास तौर पर 2,000 रुपये से अधिक की खरीदारी को लेकर भी लोगों से सवाल किया गया। इसमें 26 प्रतिशत लोगों ने क्रेडिट कार्ड और इतने ही लोगों ने नकद भुगतान को प्राथमिकता देने की बात कही।
13 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड, जबकि 11 प्रतिशत बैंक ट्रांसफर, एनईएफटी या आईएमपीएस का इस्तेमाल कर सकते हैं। केवल 20 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद वे 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल जारी रखेंगे। इसी आधार पर लोकलसर्किल्स ने अनुमान लगाया है कि 76 प्रतिशत यूजर्स बड़े भुगतान के लिए यूपीआई से दूसरे माध्यमों की ओर जा सकते हैं।
व्यापारियों में भी शुल्क को लेकर असहमति
सर्वे में व्यापारियों की राय भी सामने आई है। 242 जिलों के 32 हजार से अधिक व्यापारियों से मिली प्रतिक्रियाओं के मुताबिक, केवल 17 प्रतिशत व्यापारी 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर देने के लिए तैयार हैं।
वहीं 41 प्रतिशत व्यापारियों ने किसी भी तरह का एमडीआर देने से इनकार किया। 9 प्रतिशत व्यापारी यूपीआई स्वीकार ही नहीं करते, जबकि 15 प्रतिशत व्यापारियों ने 0.04 प्रतिशत को अधिकतम स्वीकार्य दर बताया।
यूपीआई की कुल लेनदेन राशि पर पड़ सकता है असर
लोकलसर्किल्स के अनुमान के मुताबिक, यदि 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होता है तो पहले पूरे महीने में यूपीआई लेनदेन की कुल राशि में करीब 10 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान संख्या के लिहाज से कुल व्यापारी लेनदेन का 5 प्रतिशत से भी कम हैं, लेकिन मूल्य के लिहाज से इनका हिस्सा काफी बड़ा है।
सर्वे के मुताबिक, इस श्रेणी के भुगतान की मासिक राशि करीब 6 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। यही वजह है कि बड़े भुगतान पर शुल्क का असर यूपीआई की कुल लेनदेन राशि पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है।
व्यापारी शुल्क का बोझ ग्राहक पर डाल सकते हैं
लोकलसर्किल्स के मुताबिक, 83 प्रतिशत व्यापारी 0.4 प्रतिशत एमडीआर खुद वहन करने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसी स्थिति में कुछ व्यापारी यह लागत ग्राहकों से सरचार्ज के रूप में वसूल सकते हैं, उत्पादों की कीमत में शामिल कर सकते हैं या ग्राहकों को दूसरे भुगतान माध्यमों की ओर भेज सकते हैं।
अगर ऐसा होता है तो 2,000 रुपये से अधिक की खरीदारी में बड़ी संख्या में ग्राहक यूपीआई के बजाय नकद, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि शुल्क की व्यवस्था व्यवहार में किस तरह लागू होती है और उसका भार व्यापारी या ग्राहक में से कौन उठाता है।
