नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, सरकार के टॉप सूत्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर स्थिति साफ कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस समय धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की कोई संभावना नहीं है। सरकार का मानना है कि इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि एग्जामिनेशन सिस्टम की कमियों को दूर करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना ज्यादा जरूरी है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज में कमियों की पहचान कर रही है और उन्हें दूर करने के लिए बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है। साथ ही, पेपर लीक मामलों में शामिल गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कई ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, और आगे की जांच के आधार पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का यह रुख ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन सातवें हफ्ते में पहुंच गया है। हजारों छात्र और प्रदर्शनकारी अभी भी आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से मिले लिखित आश्वासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। CJP के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ मीटिंग में अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

CJP ने सरकार के सामने दूसरी मांगें भी रखी हैं। इन मांगों में 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगना और NEET परीक्षा विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक मदद देना शामिल है। संगठन का कहना है कि सरकार को छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा सिस्टम में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

इस बीच, सरकार का कहना है कि जनता ने उसे समस्याओं को हल करने का जनादेश दिया है, और वह अपनी जिम्मेदारी पूरी करेगी। सूत्रों के मुताबिक, एजुकेशन सिस्टम को बेहतर बनाने, एग्जाम प्रोसेस को और सुरक्षित बनाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कई ज़रूरी फैसलों पर काम किया जा रहा है।

अभी सरकार और विरोध कर रहे संगठनों के बीच बातचीत चल रही है। इसलिए, आने वाले दिनों में यह देखना ज़रूरी होगा कि दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति बनती है या आंदोलन और तेज़ होता है।