नई दिल्ली। योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की युवा पीढ़ी, जेन-जी, राजनीतिक माहौल और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने एक ओर युवाओं की ओर से किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों की सराहना की, वहीं दूसरी ओर जेन-जी के एक वर्ग में हिंसा, धूम्रपान, शराब सेवन और रिश्तों को लेकर चिंता जताई। शिक्षा व्यवस्था में कथित अव्यवस्था, परीक्षा पेपर लीक और सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए।
जेन-जी को लेकर बाबा रामदेव ने क्या कहा?
बाबा रामदेव ने कहा कि देश के सभी युवाओं को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा देश और समाज के लिए अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन युवाओं का एक वर्ग गलत आदतों की ओर भी बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, "कई जेन जी युवा बहुत अच्छा कर रहे हैं, लेकिन कुछ हिंसा में लिप्त हैं। कई-कई बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड बना रहे हैं। कुछ बीड़ी-सिगरेट पीने और शराब के सेवन में लगे हुए हैं।" बाबा रामदेव ने युवाओं से अपील की कि वे नकारात्मक और गलत आदतों से दूरी बनाएं तथा सकारात्मक गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
युवाओं के विरोध-प्रदर्शन की भी की सराहना
बाबा रामदेव ने जेन-जी के विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं की सक्रियता को पूरी तरह नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं के अच्छे कार्यों और उनकी सक्रिय भूमिका की सराहना की, लेकिन साथ ही हिंसा जैसी गतिविधियों में शामिल होने वाले युवाओं पर चिंता व्यक्त की।
उनका कहना था कि युवा देश की महत्वपूर्ण शक्ति हैं और उन्हें अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगानी चाहिए। उन्होंने युवाओं को बुरी आदतों को छोड़कर अच्छे कार्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
राजनीति पर भी बाबा रामदेव ने साधा निशाना
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए बाबा रामदेव ने उन लोगों पर निशाना साधा, जो लगातार यह दावा करते हैं कि देश में कुछ भी सही नहीं चल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक रूप से हताश हैं और केवल प्रधानमंत्री की कुर्सी का सपना देख रहे हैं।
बाबा रामदेव ने कहा, "यदि देश को आपको प्रधानमंत्री बनाना होगा तो थोड़ा धैर्य रखें।" उन्होंने नेताओं और उनके समर्थकों से भी अपील की कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत दुश्मनी में तब्दील नहीं किया जाना चाहिए।
जाति और समुदाय के नाम पर विभाजन से बचने की अपील
बाबा रामदेव ने राजनीतिक दलों और नेताओं से जाति, वर्ग तथा समुदाय के आधार पर समाज को बांटने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है, लेकिन विरोध की सीमा इतनी नहीं बढ़नी चाहिए कि वह व्यक्तिगत दुश्मनी का रूप ले ले।
उन्होंने राजनीतिक मतभेदों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने की जरूरत पर जोर दिया और समाज में विभाजन पैदा करने वाली राजनीति से बचने की अपील की।
शिक्षा व्यवस्था पर क्यों भड़के बाबा रामदेव?
बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने खासतौर पर छोटे और ग्रामीण स्कूलों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कई जगह बच्चों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उनके मुताबिक, शिक्षकों, बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चे छोटे स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को बताते हुए कहा, "किताबें हैं तो शिक्षक नहीं हैं, शिक्षक हैं तो किताबें नहीं हैं। अगर किताबें हैं भी तो पेपर लीक हो जाते हैं।" उन्होंने परीक्षा पेपर लीक की समस्या को शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया।
बोर्ड परीक्षाओं की उपयोगिता पर भी उठाया सवाल
बाबा रामदेव ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की मौजूदा प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अब उच्च शिक्षा में दाखिला काफी हद तक प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं पर निर्भर हो गया है। ऐसे में छात्रों पर परीक्षा और प्रतियोगिता का अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
उनके अनुसार, मौजूदा परीक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को लगातार अलग-अलग स्तर की परीक्षाओं और प्रतिस्पर्धा से गुजरना पड़ता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव की जरूरत पर जोर दिया, जिससे छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम किया जा सके।
सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप
बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले साक्षात्कारों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले साक्षात्कार 90 से 99 प्रतिशत तक पक्षपातपूर्ण या फर्जी होते हैं। उनके अनुसार, कई मामलों में अपनी विचारधारा, जाति और पहचान से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दिए जाने की स्थिति बनती है।
यह टिप्पणी उन्होंने शिक्षा और रोजगार व्यवस्था में मौजूद समस्याओं के संदर्भ में की। उन्होंने चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।
सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर बाबा रामदेव ने आंदोलन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि हालात में सुधार नहीं किया गया तो वह इसके खिलाफ आंदोलन शुरू कर सकते हैं। खासतौर पर स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, किताबों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को उन्होंने गंभीर विषय बताया।
उनकी इस चेतावनी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनके रुख को स्पष्ट कर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि यदि विद्यार्थियों और स्कूलों से जुड़े बुनियादी मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो वह आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
युवाओं, राजनीति और शिक्षा पर एक साथ बड़ा संदेश
स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव के बयान में तीन प्रमुख मुद्दे सामने आए—जेन-जी की बदलती जीवनशैली, देश का राजनीतिक माहौल और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति। उन्होंने जहां युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी, वहीं राजनीतिक नेताओं से धैर्य और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और सुधार नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी। उनके बयान ने युवाओं की भूमिका से लेकर शिक्षा और राजनीति तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस को सामने ला दिया है।
