बिहार के मधेपुरा जिले के मुरलीगंज थाना क्षेत्र स्थित एक निजी विद्यालय से सामने आई घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जिस स्कूल को माता-पिता ने अपने बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ चुना था, वहीं से छह वर्षीय मासूम आनंद प्रेम की लाश मिलने की खबर ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है। आनंद प्रेम महज छह साल का था। वह यूकेजी का छात्र था और पिछले लगभग छह महीनों से जेडी पब्लिक स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। रविवार सुबह जब उसके परिजनों को स्कूल प्रबंधन की ओर से फोन आया, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि दूसरी तरफ से इतनी दर्दनाक खबर मिलेगी।
टॉयलेट के पास पाइप से बंधा मिला शव
परिजनों के अनुसार, स्कूल पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि आनंद प्रेम का शव स्कूल परिसर के शौचालय के पास मिला है। आरोप है कि बच्चे का शव पाइप से बंधा हुआ था। यह दृश्य देखकर परिवार सदमे में आ गया। मृतक की मां गुंजन देवी का कहना है कि उन्हें मोबाइल फोन में जो तस्वीर दिखाई गई, उसमें उनका बेटा पाइप से बंधा दिखाई दे रहा था। उनका आरोप है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए! दादी का भी कहना है कि उनके पोते की हत्या कर शव को पाइप से बांधा गया था। परिवार का आरोप है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
चश्मदीद छात्र के दावे ने बढ़ाई सनसनी
मामले को और रहस्यमय बनाने वाला दावा स्कूल के एक अन्य छात्र ने किया है। चौथी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने बताया कि रात में उसकी नींद खुली तो उसने दो लोगों को आनंद प्रेम के साथ देखा। छात्र का दावा है कि वह बच्चा छटपटा रहा था और दो लोग उसके गले में रस्सी डालकर उसे नुकसान पहुंचा रहे थे। हालांकि यह बयान अभी पुलिस जांच का हिस्सा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस दावे ने पूरे मामले को साधारण दुर्घटना से कहीं अधिक गंभीर बना दिया है।
स्कूल प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
करीब पांच वर्षों से संचालित हो रहे इस निजी विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था अब जांच के केंद्र में है। सवाल उठ रहे हैं कि- हॉस्टल में रात के समय निगरानी की क्या व्यवस्था थी? छह साल का बच्चा देर रात अकेले टॉयलेट क्षेत्र तक कैसे पहुंचा? यदि कोई बाहरी व्यक्ति परिसर में आया तो सुरक्षा कर्मियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी या नहीं? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच एजेंसियों के पास भी नहीं हैं।
घटना के बाद फरार बताया जा रहा संचालक
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद स्कूल संचालक सुनील कुमार की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खबर है कि घटना सामने आने के बाद वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। हालांकि पुलिस की जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
बच्चों की सुरक्षा पर फिर बहस
मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की चिंता को भी सामने लाता है जो अपने छोटे बच्चों को हॉस्टलों और आवासीय स्कूलों में भेजते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों के लिए संचालित हॉस्टलों में सीसीटीवी निगरानी, प्रशिक्षित वार्डन, नियमित सुरक्षा ऑडिट और आपातकालीन निगरानी तंत्र अनिवार्य होना चाहिए। यदि ऐसी व्यवस्थाएं प्रभावी होतीं तो शायद कई सवालों के जवाब तुरंत मिल सकते थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से ही सामने आएगी। यह स्पष्ट होना बाकी है कि बच्चे की मौत किन परिस्थितियों में हुई, क्या यह हत्या थी, दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और वजह थी। लेकिन एक बात साफ है- मधेपुरा के इस स्कूल में हुई घटना ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। छह साल के आनंद प्रेम की मौत अब सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुकी है।
