कटैया-निर्मली/सुपौल। बिहार के सुपौल जिले के पिपरा थाना क्षेत्र अंतर्गत तुलापट्टी पंचायत के वार्ड संख्या-1 स्थित लालपट्टी गांव में 22 वर्षीय युवक सतीश पंडित की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद जहां परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है, वहीं पुलिस प्रारंभिक तौर पर करंट लगने से मौत की सूचना मिलने की बात कह रही है। इस बीच पंचायत के जरिए समझौते की कथित कोशिश और पांच लाख रुपये में मामला निपटाने के आरोपों ने पूरे प्रकरण को और भी संवेदनशील बना दिया है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। मृतक के परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
क्या हुआ था लालपट्टी में?
मृतक सतीश पंडित अपने परिवार का सबसे छोटा बेटा था। शनिवार शाम उसकी मौत की खबर घर पहुंचते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों का आरोप है कि लालपट्टी चौक स्थित एक पान दुकान के पास कुछ लोगों ने सतीश के साथ मारपीट की थी। मृतक के पिता लालो पंडित का दावा है कि उनके बेटे को कई लोगों ने मिलकर बुरी तरह पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोप है कि बाद में उसे ई-रिक्शा पर लिटाया गया और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी पक्ष ने शव को घर पहुंचा दिया। परिवार का कहना है कि सतीश पूरी तरह स्वस्थ था और उसके शरीर पर चोटों के कई निशान मौजूद थे। उनका आरोप है कि मौत के बाद पूरे मामले को दुर्घटना या करंट लगने से हुई मौत साबित करने की कोशिश की गई।
हत्या या हादसा? सवालों के घेरे में मौत
इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सतीश की मौत कैसे हुई? परिजन जहां इसे सुनियोजित हत्या बता रहे हैं, वहीं शुरुआती स्तर पर पुलिस को करंट लगने से मौत की सूचना दी गई थी। ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन सकती है ! ग्रामीणों का कहना है कि यदि शरीर पर चोट के निशान हैं तो उनकी वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए। वहीं यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि करंट लगने की बात कहां से और कैसे सामने आई।
‘पंचायत में मौत का सौदा’ करने का आरोप
घटना के बाद सबसे गंभीर आरोप रविवार को सामने आया। परिजनों का दावा है कि स्थानीय स्तर पर पंचायत बुलाई गई, जिसमें कुछ जनप्रतिनिधियों, प्रभावशाली लोगों और अन्य व्यक्तियों की मौजूदगी में मामले को समझौते के जरिए खत्म करने की कोशिश की गई। मृतक के परिवार का आरोप है कि पांच लाख रुपये देकर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस दावे ने गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा तेज कर दी है। यदि इस आरोप में सच्चाई पाई जाती है तो यह केवल एक मौत का मामला नहीं रहेगा, बल्कि न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश का भी गंभीर विषय बन सकता है।
मोबाइल फोन गायब, जांच में नया मोड़
मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मृतक का मोबाइल फोन अब तक बरामद नहीं हो सका है। परिजनों का मानना है कि मोबाइल फोन में घटना से जुड़े अहम सुराग हो सकते हैं। कॉल रिकॉर्ड, चैट और आखिरी लोकेशन जैसी जानकारियां जांच को नई दिशा दे सकती हैं। ऐसे में मोबाइल का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। जांच एजेंसियों के लिए यह मोबाइल एक महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकता है।
परिवार में मातम, गांव में बेचैनी
सतीश पंडित अविवाहित था और परिवार की उम्मीदों का सहारा माना जाता था। उसकी अचानक हुई मौत से घर में मातम पसरा हुआ है। मां, पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए, चाहे वह हत्या हो या हादसा। लोगों का मानना है कि बिना निष्पक्ष जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पुलिस क्या कह रही है?
पिपरा थानाध्यक्ष राजेश कुमार झा के अनुसार पुलिस को प्रारंभिक सूचना बिजली के करंट से युवक की मौत होने की मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर
लालपट्टी की यह घटना केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि कई सवालों से घिरी एक ऐसी कहानी बन गई है जिसमें हत्या, दुर्घटना, समझौते के आरोप और गायब मोबाइल जैसी कई परतें हैं।अब पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक जांच और पुलिस की निष्पक्ष पड़ताल से ही सामने आ सकेगी। गांव के लोग भी यही उम्मीद कर रहे हैं कि जांच तथ्यों के आधार पर हो और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
