बागपत। उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा बनने का सपना पूरा होने के बाद बागपत में तैनात 21 सिपाहियों के सामने अब एक अलग ही परेशानी खड़ी हो गई है। जुलाई 2026 में दरोगा भर्ती 2025 का परिणाम जारी होने के बाद इन सिपाहियों का चयन दरोगा पद के लिए हुआ है, लेकिन मौजूदा सिपाही की नौकरी छोड़कर नए पद पर जाने से पहले उन्हें बड़ी रकम जमा करनी पड़ सकती है। इन सिपाहियों के सामने करीब आठ-आठ लाख रुपये तक की राशि जमा करने की चुनौती बताई जा रही है।
दरोगा का चयन हुआ, लेकिन अब बॉन्ड की शर्त बनी परेशानी
दरोगा भर्ती में चयनित होने वाले इन सिपाहियों की परेशानी की वजह उनकी पिछली नियुक्ति के समय भरवाया गया बॉन्ड है। सिपाही पद पर भर्ती के समय उनसे यह बॉन्ड लिया गया था कि वे अपनी दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने से पहले नौकरी नहीं छोड़ेंगे। अब दरोगा पद पर चयन होने के बाद उन्हें सिपाही पद से अलग होकर नई जिम्मेदारी संभालनी है।
ऐसे में बॉन्ड की शर्त उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन गई है। जानकारी के अनुसार, यदि परिवीक्षा अवधि पूरी होने से पहले सिपाही पद छोड़ा जाता है तो प्रशिक्षण पर हुए खर्च और दो साल के वेतन की राशि जमा करनी पड़ सकती है। चयनित सिपाहियों के सामने इसी राशि को लेकर चिंता बनी हुई है।
10 महीने की ट्रेनिंग पर खर्च हुए थे 863 रुपये प्रतिदिन
सिपाही पद पर भर्ती होने के बाद इन जवानों को करीब 10 महीने का प्रशिक्षण दिया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक सिपाही के प्रशिक्षण पर प्रतिदिन 863 रुपये खर्च हुए थे। 10 महीने की अवधि के हिसाब से एक सिपाही की ट्रेनिंग पर करीब 2.58 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
प्रशिक्षण के दौरान ही सिपाहियों से बॉन्ड भरवाया गया था। इस बॉन्ड में परिवीक्षा अवधि से जुड़ी शर्तें शामिल थीं। अब दरोगा पद पर चयन के बाद वही शर्तें उनके सामने आर्थिक दायित्व के रूप में आ गई हैं।
करीब आठ लाख रुपये की रकम कैसे जुटाएं, यही सबसे बड़ा सवाल
बागपत में तैनात 21 चयनित सिपाहियों के सामने सबसे बड़ी चिंता रकम जुटाने की है। बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण खर्च के साथ दो साल के वेतन को जोड़ने पर एक सिपाही पर करीब आठ लाख रुपये की देनदारी बन रही है। इतनी बड़ी रकम अचानक जमा करना उनके लिए आसान नहीं है।
चयनित सिपाहियों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उन्होंने सिपाही की नौकरी छोड़कर किसी दूसरे विभाग या निजी संस्था में जाने का फैसला नहीं किया है। वे इसी पुलिस विभाग में उच्च पद पर जाने का अवसर हासिल कर रहे हैं। इसके बावजूद मौजूदा पद से नए पद पर जाने के दौरान बॉन्ड की शर्त उनके सामने आर्थिक चुनौती बनकर खड़ी हो गई है।
प्रदेश में सैकड़ों चयनित सिपाहियों के सामने ऐसी स्थिति
यह मामला केवल बागपत में तैनात 21 सिपाहियों तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। दरोगा भर्ती 2025 में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सैकड़ों सिपाहियों का चयन दरोगा पद के लिए हुआ है। इनमें ऐसे सिपाही भी शामिल हैं, जिन्होंने अभी अपनी दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी नहीं की है।
ऐसे चयनित सिपाहियों के सामने भी बॉन्ड की शर्त लागू होने की स्थिति में आर्थिक परेशानी खड़ी हो सकती है। यही वजह है कि चयनित सिपाही इस मामले में कोई रास्ता निकलने की उम्मीद कर रहे हैं।
सिपाहियों की मांग-ट्रेनिंग खर्च देने को तैयार, वेतन नहीं
चयनित सिपाहियों की ओर से सामने आई परेशानी में एक प्रमुख बात यह है कि वे प्रशिक्षण पर हुए खर्च की राशि जमा करने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण पर विभाग ने जो खर्च किया है, उसे परिवार से पैसे लेकर भी जमा किया जा सकता है।
लेकिन दो साल के वेतन की रकम जमा करना उनके लिए ज्यादा कठिन है। उनका तर्क है कि वेतन उन्हें हर महीने मिला और उसी दौरान घरेलू जरूरतों तथा अन्य खर्चों में इस्तेमाल हो गया। ऐसे में अब दो साल की पूरी वेतन राशि एक साथ जमा करना उनके लिए मुश्किल है।
दरोगा बनने का अवसर, लेकिन आर्थिक बोझ ने बढ़ाई चिंता
दरोगा भर्ती में चयन इन सिपाहियों के लिए करियर में आगे बढ़ने का बड़ा अवसर है। सिपाही पद से दरोगा बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी और पद दोनों बदलेंगे। लेकिन मौजूदा स्थिति में चयनित सिपाही इस बात को लेकर परेशान हैं कि नए पद पर जाने से पहले इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था कैसे की जाए।
बागपत में तैनात 21 सिपाहियों का चयन होने के बाद उनके सामने यही सवाल खड़ा है। वे विभाग से बाहर नहीं जा रहे हैं, बल्कि इसी पुलिस विभाग में दरोगा पद पर चयनित हुए हैं। ऐसे में चयनित सिपाहियों की नजर अब इस बात पर है कि बॉन्ड की शर्तों को लेकर कोई समाधान निकलता है या नहीं।
बॉन्ड की शर्त ने बदल दी चयन के बाद की तस्वीर
दरोगा भर्ती का परिणाम आने के बाद जहां चयनित सिपाहियों और उनके परिवारों में खुशी होनी चाहिए थी, वहीं बॉन्ड से जुड़ी आर्थिक जिम्मेदारी ने चिंता बढ़ा दी है। दो साल की परिवीक्षा पूरी नहीं होने के कारण मौजूदा सिपाही पद छोड़ने पर प्रशिक्षण खर्च और वेतन से जुड़ी राशि जमा करने की बात सामने आई है।
सिपाहियों का कहना है कि दरोगा पद पर उनका चयन विभाग के भीतर ही हुआ है। इसलिए वे प्रशिक्षण पर हुए खर्च को वापस करने की संभावना को समझते हैं, लेकिन दो साल का वेतन एक साथ लौटाना उनके लिए बड़ी आर्थिक चुनौती है।
अब समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं चयनित सिपाही
बागपत के 21 चयनित सिपाहियों सहित प्रदेश के अन्य चयनित सिपाहियों की नजर अब इस बात पर है कि इस स्थिति से निकलने का कोई रास्ता सामने आता है या नहीं। चयनित सिपाही दरोगा पद पर जाने के लिए तैयार हैं और विभाग छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं। उनकी मुख्य चिंता बॉन्ड के तहत बताई जा रही आर्थिक देनदारी को लेकर है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिपाही पद पर भर्ती के समय दो साल की परिवीक्षा अवधि से जुड़ा बॉन्ड लिया गया था। अब दरोगा पद पर चयन के बाद उसी बॉन्ड की शर्त के कारण चयनित सिपाहियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
