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ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के दौरान ईरान ने जॉर्डन के अल-अजरक सैन्य एयरबेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह एयरबेस जॉर्डन का है, लेकिन यहां अमेरिकी सेना भी अपनी क्रियाकलाप चलाती है। ईरान ने कहा कि यह हमला हाल में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया।

अमेरिका की कार्रवाई के बाद तनाव और बढ़ गया। दरअसल, कुछ दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हालात अचानक बिगड़ गए थे। अमेरिका ने आरोप लगाया कि उसके सैन्य ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाया गया है। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिका ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया।अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान का दावा है कि उसने जॉर्डन के अल-अजरक एयरबेस समेत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कुछ अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।

मिसाइलों की संख्या को लेकर अलग अलग दावे

हमले में कितनी मिसाइलें दागी गईं, इसे लेकर अलग अलग दावे किये जा रहे हैं। ईरान का कहना है कि उसने एयरबेस पर 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जबकि जॉर्डन की सेना ने सिर्फ इतना कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) ने कई मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया। जॉर्डन के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया। मिसाइलों के कुछ टुकड़े जॉर्डन की जमीन पर गिरे, लेकिन अच्छी बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने या किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नही आई नहीं है।

क्यों अहम है अल-अजरक एयरबेस?

अल-अजरक, जिसे मुवाफ्फक सल्ती एयरबेस के नाम से भी जाना जाता है, जॉर्डन के सबसे अहम सैन्य ठिकानों में से एक है। इस एयरबेस का इस्तेमाल जॉर्डन की सेना के अलावा अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी देश भी करते हैं। यही वजह है कि ईरान के हमले के दावे के बाद पूरे इलाके में चिंता बढ़ गई है।

कई देशों में बजने लगे सायरन

ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद जॉर्डन, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे। कई देशों ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को तुरंत सक्रिय कर दिया। बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी देखने को मिला और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया।

मध्य पूर्व में पहले से ही हालात नाजुक बने हुए हैं। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच ताजा घटनाक्रम ने चिंता और बढ़ा दी है। फिलहाल दोनों देशों की तरफ से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।