तेहरान/वॉशिंगटन: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया की नजर लाल सागर के बाब अल-मंदेब जलमार्ग पर टिक गई है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह अहम समुद्री मार्ग भी प्रभावित होता है, तो वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बाब अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा
ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि यदि यमन पर सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो बाब अल-मंदेब जलमार्ग को बंद करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। यह जलमार्ग यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार का प्रमुख रास्ता माना जाता है।
तेल की कीमतों पर पड़ सकता है असर
हूती आंदोलन से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि यदि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों जलमार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, यह एक दावा है और भविष्य की स्थिति पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दबाव का माध्यम बन सकता है। उनका मानना है कि यदि दोनों समुद्री मार्गों पर संकट गहराता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग उद्योग पर पड़ सकता है।
पहले भी हो चुके हैं हमले
अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में कई वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। इसके बाद कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का रूट बदलकर केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजना शुरू कर दिया, जिससे परिवहन लागत और सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
तनाव पर बनी हुई है नजर
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक बल तैनात किए हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में कूटनीतिक समाधान बेहद जरूरी है, ताकि क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक आर्थिक जोखिम को कम किया जा सके।
