नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी सरकारी बैंकों को युवाओं की बदलती जरूरतों और पसंद के अनुसार अपनी कार्यशैली में बदलाव करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों को केवल इस उम्मीद में नहीं बैठना चाहिए कि युवा ग्राहक खुद शाखाओं में आएंगे, बल्कि बैंकों को कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य शैक्षणिक परिसरों तक सीधे पहुंचना चाहिए।
युवाओं के लिए ‘कूल’ बैंकिंग अनुभव बनाने की सलाह
वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कारोबार की समझदारी बनाए रखते हुए युवाओं के बीच अपनी छवि को अधिक आकर्षक बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी की अपेक्षाएं और बैंकिंग को लेकर उसकी सोच पहले की तुलना में अलग है। ऐसे में सरकारी बैंकों को अपनी सेवाओं और युवाओं से जुड़ने के तरीकों में बदलाव करना होगा।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को युवाओं के साथ सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी अपेक्षाओं को समझना चाहिए। इसके साथ ही बैंकिंग सेवाओं को उनके लिए अधिक आकर्षक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
निजी बैंकों को ज्यादा पसंद करते हैं युवा
वित्त मंत्री ने युवाओं के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अब भी कई युवाओं के बीच पारंपरिक ‘सरकारी बैंक’ वाली छवि बनी हुई है। इसके विपरीत कुछ युवा निजी बैंकों को अधिक आकर्षक मानते हैं।
उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान कुछ युवाओं ने खाता खोलने के लिए निजी बैंकों को प्राथमिकता देने की बात कही। इसकी वजह उन्होंने निजी बैंकों की ‘कूल’ छवि को बताया। वित्त मंत्री ने सरकारी बैंकों को इसी धारणा को बदलने की दिशा में काम करने की सलाह दी।
शाखाओं में युवाओं का इंतजार नहीं, खुद उनके बीच जाएं बैंक
निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उन्हें युवाओं के शाखाओं में आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। इसके बजाय बैंकिंग संस्थानों को सीधे युवाओं के बीच पहुंचकर उनसे संवाद स्थापित करना चाहिए।
उन्होंने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य परिसरों को युवाओं से जुड़ने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। इन स्थानों पर बैंक खाता खोलने, वित्तीय जागरूकता बढ़ाने और युवाओं के साथ सीधे संवाद के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
मुफ्त ऑनलाइन सीखने की सामग्री उपलब्ध कराने का सुझाव
वित्त मंत्री ने सरकारी बैंकों को प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंचों और संस्थानों के सहयोग से युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन सीखने की सामग्री उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया। इसका उद्देश्य युवाओं को बैंकिंग और वित्तीय विषयों से जुड़ी जानकारी आसान तरीके से उपलब्ध कराना है।
उन्होंने इस तरह की पहल के जरिए युवाओं को बैंकिंग सेवाओं के साथ जोड़ने और उन्हें वित्तीय मामलों की बेहतर समझ देने पर जोर दिया।
फिटनेस और कल्याण से जुड़े लाभ भी दे सकते हैं बैंक
वित्त मंत्री ने बैंकिंग सेवाओं को केवल खाते, जमा और ऋण तक सीमित रखने के बजाय युवाओं की जीवनशैली से जुड़े लाभों से जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने फिटनेस केंद्रों और योग केंद्रों से जुड़े लाभ देने की संभावना पर भी बात की।
इसके अलावा विश्वसनीय मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण मंचों से जुड़े कूपन या वाउचर उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया। इसका उद्देश्य युवाओं के लिए बैंकिंग संबंध को अधिक उपयोगी और आकर्षक बनाना है।
‘युवा कियोस्क’ और ‘युवा बैंकिंग मित्र’ की सलाह
निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में युवाओं के लिए विशेष केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया। इनमें ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ जैसे समर्पित केंद्र शामिल हो सकते हैं।
ऐसे केंद्रों पर एक समर्पित कर्मचारी युवाओं को उनकी वित्तीय यात्रा के दौरान मार्गदर्शन दे सकता है। इसमें बैंक खाता खोलने से लेकर अन्य बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय जरूरतों को समझने में सहायता दी जा सकती है।
2 अक्टूबर से शुरू होगा ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान
वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से 2 अक्टूबर 2026 से एक महीने का ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान शुरू करने को कहा है। इस अभियान में 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अभियान के दौरान युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने, वित्तीय जागरूकता बढ़ाने और उनकी बैंकिंग जरूरतों को समझने पर जोर दिया जाएगा। इसके जरिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक युवा ग्राहकों के साथ अपना सीधा संपर्क बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
युवाओं को लोन और क्रेडिट की जानकारी देने पर जोर
वित्त मंत्री ने युवाओं के बीच औपचारिक ऋण व्यवस्था को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को क्रेडिट स्कोर, अलग-अलग बैंक ऋण उत्पादों और सरकारी ऋण योजनाओं के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।
इससे युवाओं को भविष्य में कारोबार या उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने में मदद मिल सकती है। बैंक युवाओं को यह भी समझा सकते हैं कि अच्छा क्रेडिट स्कोर और मजबूत क्रेडिट इतिहास बनाए रखना क्यों महत्वपूर्ण है।
भविष्य के उद्यमियों के लिए बैंकिंग समझ जरूरी
निर्मला सीतारमण ने युवाओं को औपचारिक बैंकिंग और ऋण व्यवस्था की जानकारी देने को भविष्य की वित्तीय जरूरतों से भी जोड़ा। उनका कहना है कि यदि युवा शुरुआत से ही क्रेडिट स्कोर, क्रेडिट इतिहास और उपलब्ध ऋण विकल्पों को समझेंगे तो भविष्य में वित्तीय जरूरतों के समय उन्हें बेहतर तरीके से निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
विशेष रूप से कारोबार या उद्यम शुरू करने की योजना बनाने वाले युवाओं के लिए बैंकिंग और ऋण उत्पादों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
सरकारी बैंकों के सामने बदलती युवा पसंद की चुनौती
वित्त मंत्री की सलाह ऐसे समय में सामने आई है जब बैंकिंग क्षेत्र में युवा ग्राहकों की जरूरतें और अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं। सरकारी बैंकों को अब केवल पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं तक सीमित रहने के बजाय युवाओं के साथ संवाद, डिजिटल माध्यमों, वित्तीय शिक्षा और नई सुविधाओं के जरिए संबंध मजबूत करने पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
निर्मला सीतारमण के सुझावों में एक तरफ युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर जोर है, तो दूसरी तरफ सरकारी बैंकों की पारंपरिक छवि को अधिक आधुनिक और युवा-केंद्रित बनाने की दिशा भी दिखाई देती है।
