दुनियाभर में वजन घटाने वाली GLP-1 दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल का असर अब डेयरी और प्रोटीन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। व्हे प्रोटीन की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण इसकी कीमतों में पिछले एक साल में करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक बाजार की दिशा बदल सकता है।
GLP-1 दवाएं मोटापा और डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। इन दवाओं का उपयोग करने वाले लोग कम खाना खाते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण देने के लिए ज्यादा प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों की मांग कर रहे हैं। इसी वजह से व्हे प्रोटीन और हाई-प्रोटीन डेयरी उत्पादों की बिक्री तेजी से बढ़ी है।
डेयरी कंपनियां अब इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुट गई हैं। यूरोप की बड़ी डेयरी कंपनियां Arla Foods और FrieslandCampina अपने प्लांट्स का विस्तार कर रही हैं। वहीं Danone और Bel Group जैसी कंपनियां नए हाई-प्रोटीन उत्पाद बाजार में उतार रही हैं। Danone ने अपने Oikos ब्रांड के तहत प्रोटीन युक्त उत्पादों की नई रेंज शुरू की है, जबकि Babybel Protein जैसे स्नैक्स भी बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
अमेरिका की Dairy Farmers of America ने भी अपने कई उत्पादन केंद्रों को हाई-प्रोटीन डेयरी उत्पादों के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। कंपनी का कहना है कि डेयरी प्रोटीन की मांग इतनी तेजी से बढ़ रही है कि बाजार में लगभग “दौड़” जैसी स्थिति बन गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन क्षमता की है। साधारण व्हे को हाई-प्रोटीन कंसंट्रेट और आइसोलेट में बदलने के लिए विशेष तकनीक और प्लांट्स की जरूरत होती है। फिलहाल दुनिया में ऐसी सुविधाएं सीमित हैं। इसी कारण कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। FrieslandCampina ने नीदरलैंड स्थित अपने प्लांट की क्षमता दोगुनी कर दी है और अमेरिका की Wisconsin Whey Protein कंपनी का अधिग्रहण भी किया है। इस विस्तार पर कंपनी 90 मिलियन यूरो से ज्यादा खर्च कर रही है।
सिर्फ GLP-1 दवाओं के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग भी अब ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। लोग कम मात्रा में लेकिन ज्यादा पोषण वाला खाना पसंद कर रहे हैं। कई लोग रेस्तरां में बड़े भोजन की बजाय छोटे हिस्सों में खाना साझा करना पसंद कर रहे हैं। इस ट्रेंड का असर फूड इंडस्ट्री पर भी दिखाई दे रहा है, जहां कंपनियां अपने उत्पादों को “हाई-प्रोटीन” और “न्यूट्रिशन-रिच” बनाकर पेश कर रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर आने वाले वर्षों में GLP-1 दवाओं का उपयोग इसी तरह बढ़ता रहा, तो हाई-प्रोटीन डेयरी उत्पाद डेयरी उद्योग की सबसे बड़ी ग्रोथ कैटेगरी बन सकते हैं। अनुमान है कि 2028 तक अमेरिका में करीब 7 करोड़ लोग इन दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे व्हे प्रोटीन की मांग और ज्यादा बढ़ सक
ती है।
