सिर्फ डिजाइन नहीं, दूध की पहचान बताते हैं ये रंग

जब भी हम बाजार से दूध खरीदते हैं, तो अक्सर पैकेट का रंग देखकर ही अपनी पसंद चुन लेते हैं। किसी का पैकेट नीला होता है, किसी का हरा तो किसी का नारंगी। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ ब्रांडिंग या डिजाइन का हिस्सा समझते हैं, लेकिन असल में इन रंगों के पीछे एक पूरा सिस्टम छिपा होता है। दूध के पैकेटों पर दिए गए रंग यह बताते हैं कि उस दूध में फैट यानी मलाई की मात्रा कितनी है और वह किस कैटेगरी का दूध है। यही वजह है कि अलग-अलग कंपनियां अपने दूध के पैकेटों को अलग रंगों में पेश करती हैं, ताकि ग्राहक बिना ज्यादा जानकारी पढ़े अपनी जरूरत के हिसाब से सही दूध चुन सके।


नीला, हरा और नारंगी रंग का क्या मतलब होता है?

भारत में दूध के पैकेटों के रंगों का सीधा संबंध उसकी फैट क्वालिटी से होता है। आमतौर पर नीले रंग का पैकेट टोन्ड मिल्क के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें लगभग 3 प्रतिशत फैट होता है और यह रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सबसे ज्यादा खरीदा जाने वाला दूध माना जाता है। वहीं हरे रंग का पैकेट स्टैंडर्ड या होल मिल्क की पहचान माना जाता है, जिसमें फैट की मात्रा थोड़ी ज्यादा यानी लगभग 4.5 प्रतिशत होती है। दूसरी ओर नारंगी या मेजेंटा रंग का पैकेट फुल क्रीम दूध को दर्शाता है, जिसमें सबसे ज्यादा मलाई और लगभग 6 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है। कई कंपनियां पीले रंग का इस्तेमाल डबल टोन्ड या लो-फैट दूध के लिए भी करती हैं।


विदेशों में भी अपनाया जाता है यही कलर सिस्टम

दूध के रंगों का यह सिस्टम सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में इसी तरह के कलर कोड का इस्तेमाल किया जाता है। ब्रिटेन और यूरोप के कई हिस्सों में नीले रंग को फुल फैट दूध की पहचान माना जाता है, जबकि हरे रंग का उपयोग सेमी-स्किम्ड मिल्क के लिए किया जाता है। वहीं अमेरिका में लाल रंग का पैकेट या ढक्कन होल मिल्क के लिए इस्तेमाल होता है और हल्के नीले या गुलाबी रंग का इस्तेमाल लो-फैट दूध के लिए किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को आसान तरीके से दूध की गुणवत्ता और फैट लेवल समझाना होता है।


सेहत के हिसाब से कौन सा दूध है बेहतर?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से दूध का चुनाव अलग हो सकता है। बच्चों, खिलाड़ियों और ज्यादा ऊर्जा की जरूरत वाले लोगों के लिए फुल क्रीम दूध बेहतर माना जाता है, क्योंकि इसमें विटामिन-D और ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है। वहीं वजन कम करने वाले लोगों या हार्ट से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए टोन्ड या स्किम्ड दूध ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। यही कारण है कि दूध के पैकेटों पर दिए गए रंग सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि आपकी सेहत से जुड़ी अहम जानकारी भी देते हैं।