erer | Source: ererनई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen Z आंदोलन के बाद आंदोलन की अगली दिशा को लेकर चर्चा तेज है। इसी बीच वामपंथी छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने ऐसा बयान दिया है, जिसने छात्र आंदोलनों में नेतृत्व और भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नेहा बोरा ने कहा कि Gen Z को न तो अभिजीत दीपके और न ही उनकी जरूरत है। उनके मुताबिक जंतर-मंतर का आंदोलन किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि खुद युवाओं और आम लोगों का आंदोलन था।

नेहा बोरा ने कहा कि देशभर में ऐसे छात्र और युवा मौजूद हैं जो व्यवस्था, उसकी कमियों और उसे बेहतर बनाने के तरीकों को समझते हैं। ऐसे युवा अपने मुद्दों को खुद सामने ला रहे हैं और अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इन आंदोलनों को किसी एक चेहरे या नेता के सहारे की आवश्यकता नहीं है।

‘Gen Z का आंदोलन उनका अपना था’, नेहा बोरा ने क्यों कही यह बात?

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर सवाल पूछे जाने पर नेहा बोरा ने कहा कि Gen Z आंदोलन मूल रूप से लोगों का अपना आंदोलन था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके मुद्दों को उठाने के लिए किसी खास व्यक्ति की जरूरत नहीं है।

उनके अनुसार, अभिजीत दीपके या उनकी अपनी भूमिका को आंदोलन का केंद्र मानना उचित नहीं होगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में आम छात्र और राजनीतिक रूप से जागरूक युवा अपने आसपास की समस्याओं को समझ रहे हैं और उन्हें लेकर आवाज उठा रहे हैं। नेहा बोरा का कहना है कि यही छात्र और युवा अपने मुद्दों को आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।

छात्र आंदोलनों में एकजुटता को बताया जरूरी

नेहा बोरा ने कहा कि अलग-अलग छात्र आंदोलनों के बीच एकजुटता दिखाने के लिए आइसा की भागीदारी का उद्देश्य उन लोगों का समर्थन करना है, जो पहले से अपनी आवाज उठा रहे हैं और अपनी लड़ाई खुद लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां छात्र अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहां उनके साथ खड़ा होना ही संगठन का उद्देश्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक मुद्दे पर और एक स्थान पर एकजुट होकर आने की जरूरत पड़ने पर छात्र संगठन ऐसा करते रहेंगे। उनके मुताबिक अलग-अलग संगठनों के बीच मतभेद या अलग-अलग गतिविधियों के बावजूद किसी साझा मुद्दे पर साथ आने की संभावना बनी रहती है।

5 सितंबर की पहल में साथ आने की बात

नेहा बोरा ने सीजेपी और छात्र संगठनों के बीच तालमेल को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि सीजेपी की ओर से 5 सितंबर को कार्रवाई के लिए एक अपील जारी की गई है। उनके अनुसार यह अपील उसी आंदोलन से जुड़ी हुई है, जिसका वे भी हिस्सा रहे हैं।

नेहा बोरा ने कहा कि सभी छात्र संगठन मिलकर 5 सितंबर की इस पहल को सफल बनाने के लिए इसमें हिस्सा लेंगे। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच साझा मुद्दों पर सहयोग और एकजुटता को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

‘छात्र आंदोलन किसी एक नेता का मोहताज नहीं’

आइसा अध्यक्ष ने छात्र आंदोलनों के नेतृत्व को लेकर कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी एक नेता पर निर्भर नहीं होता। उनके मुताबिक छात्र स्वयं अपना नेतृत्व तैयार करते हैं। अलग भाषा बोलने वाले, अलग-अलग राज्यों में रहने वाले और अलग-अलग विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र अपने मुद्दों को लेकर सामने आते हैं।

उन्होंने फीस बढ़ोतरी और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र इन समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इसके अलावा जेपीएससी, बीपीएसी और नीट जैसी परीक्षाओं में कथित धांधली से जुड़े मुद्दों को भी छात्र आंदोलनों में उठाया गया है। नीट परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर भी छात्र अपनी आवाज सामने रख चुके हैं।

देशभर के छात्रों को एक नेटवर्क में जोड़ने की जरूरत

नेहा बोरा ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र अपने-अपने मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार जरूरत इस बात की है कि इन छात्रों को एक नेटवर्क में जोड़ा जाए, उन्हें समर्थन मिले और वे अपने मुद्दों पर आगे काम कर सकें।

उनका मानना है कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और राज्यों में सक्रिय छात्र आंदोलनों के बीच संपर्क बढ़ने से उनकी आवाज को व्यापक स्तर पर सामने लाया जा सकता है। उन्होंने छात्र संगठनों की भूमिका को ऐसे आंदोलनों को समर्थन देने से जोड़ा।

‘जंतर-मंतर आंदोलन ने डर खत्म किया’, पहले भी बोली थीं नेहा बोरा

नेहा बोरा ने गुरुवार को कहा था कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen Z आंदोलन ने लोगों के अंदर सरकार के खिलाफ बोलने का डर खत्म कर दिया है। उनके मुताबिक अब लोग सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ अपनी बात रखने से डर नहीं रहे हैं।

उन्होंने कहा था कि इस आंदोलन ने भाजपा और आरएसएस को छात्रों और युवाओं से संपर्क करने के लिए मजबूर किया है। बोरा ने आरोप लगाया था कि भाजपा और आरएसएस ने सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ बोलने वाले लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की और इसके लिए उन्हें 'राष्ट्र विरोधी' तथा 'देशद्रोही' बताया गया।

युवाओं के बीच भाजपा की लोकप्रियता को लेकर भी दावा

आइसा अध्यक्ष ने कहा था कि भाजपा ने कभी नहीं सोचा था कि पिछले कुछ महीनों में युवाओं के बीच उसकी लोकप्रियता इतनी कम हो जाएगी। उन्होंने लोकतंत्र में सरकार और जनता के संबंध को लेकर भी अपनी बात रखी।

नेहा बोरा के मुताबिक लोकतंत्र में लोगों को सरकार से डरना नहीं चाहिए। इसके उलट सरकार को जनता के आक्रोश से डरना चाहिए। उन्होंने सरकार को उसके कामों के लिए जवाबदेह बनाए जाने की बात कही।

आंदोलन में नेतृत्व से ज्यादा मुद्दों पर जोर

नेहा बोरा के ताजा बयान का सबसे अहम हिस्सा यही है कि उन्होंने छात्र आंदोलनों को किसी एक नेता या चेहरे से जोड़ने के बजाय छात्रों की सामूहिक भूमिका पर जोर दिया है। उनका कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में छात्र स्वयं अपने मुद्दों को पहचान रहे हैं और उन्हें लेकर आंदोलन भी कर रहे हैं।

फीस, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों की सक्रियता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों को एक-दूसरे से जोड़ने और समर्थन देने की जरूरत है। इसी संदर्भ में उन्होंने 5 सितंबर की प्रस्तावित पहल में विभिन्न छात्र संगठनों की भागीदारी की बात कही।