erer | Source: rereशादी के बाद गर्भावस्था की खबर किसी भी दंपती के लिए खुशी का पल हो सकती है, लेकिन जब जांच में गर्भावस्था की अवधि शादी के बाद बीते समय से अधिक दिखाई दे, तो कई सवाल भी उठ सकते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक नवविवाहिता ने डॉक्टर से हैरानी जताते हुए पूछा कि उसकी शादी को अभी सिर्फ एक महीना हुआ है, फिर गर्भ में डेढ़ महीने का बच्चा कैसे हो सकता है? महिला की उलझन सुनने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गरिमा सिंह ने उसे गर्भावस्था की अवधि की गणना का तरीका समझाया। डॉक्टर के मुताबिक, गर्भावस्था की अवधि शादी की तारीख या पति-पत्नी के संबंध बनाने की तारीख से नहीं, बल्कि आखिरी माहवारी के पहले दिन से गिनी जाती है।

“मैम, मेरी शादी को बस एक महीना हुआ है”

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गरिमा सिंह ने अपने सोशल मीडिया पेज पर एक वीडियो साझा किया है। इसमें वह एक महिला की जांच के दौरान बताती हैं कि गर्भावस्था की अवधि लगभग डेढ़ महीने दिखाई दे रही है। यह सुनकर महिला हैरान हो जाती है और कहती है कि उसकी शादी को अभी केवल एक महीना ही हुआ है। ऐसे में गर्भावस्था की अवधि डेढ़ महीने कैसे हो सकती है? महिला का सवाल पहली नजर में स्वाभाविक लग सकता है, क्योंकि आमतौर पर लोग गर्भावस्था की अवधि को गर्भधारण या शादी के बाद बीते समय से जोड़कर देखते हैं। लेकिन चिकित्सकीय गणना का तरीका इससे अलग होता है। इसी अंतर के कारण कई महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में अपनी रिपोर्ट समझने में परेशानी होती है। डॉ. गरिमा सिंह ने महिला को समझाया कि गर्भावस्था की अवधि का आकलन आखिरी माहवारी के पहले दिन से किया जाता है। इसलिए जांच में गर्भावस्था की अवधि शादी के बाद बीते समय से अधिक दिखाई दे सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि गर्भधारण शादी से पहले हुआ है।

शादी से 14 दिन पहले आई थी माहवारी

डॉक्टर के मुताबिक, इस मामले में महिला को शादी से लगभग 14 दिन पहले माहवारी आई थी। इसके बाद शादी के बाद उसने गर्भधारण किया। जब गर्भावस्था की अवधि की गणना आखिरी माहवारी के पहले दिन से की गई, तो जांच में गर्भावस्था लगभग डेढ़ महीने की दिखाई दी। यही वह बात थी, जिसे समझने की जरूरत थी। महिला शादी के बाद बीते एक महीने को गर्भावस्था की अवधि मान रही थी, जबकि चिकित्सकीय गणना में माहवारी के पहले दिन से समय जोड़ा जाता है। इस कारण दोनों अवधियों में अंतर दिखाई दे रहा था। यहां ध्यान देने वाली बात है कि गर्भावस्था की अवधि और गर्भधारण के बाद बीता वास्तविक समय हमेशा एक जैसा नहीं होता। आमतौर पर गर्भधारण माहवारी चक्र के बाद के हिस्से में होता है, जबकि गर्भावस्था की चिकित्सकीय गणना उससे पहले शुरू कर दी जाती है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताई गई गर्भावस्था की अवधि गर्भधारण के समय से लगभग दो सप्ताह अधिक हो सकती है। हालांकि, यह अंतर हर महिला में उसके माहवारी चक्र और गर्भधारण के समय के अनुसार अलग हो सकता है।

कैसे की जाती है प्रेग्नेंसी की गणना?

गर्भावस्था की अवधि निर्धारित करने के लिए चिकित्सक आमतौर पर महिला की आखिरी माहवारी के पहले दिन को आधार बनाते हैं। इस तारीख से गर्भावस्था के सप्ताह और दिनों की गणना की जाती है। इसे गर्भावस्था की चिकित्सकीय आयु कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी महिला की आखिरी माहवारी शुरू हुए छह सप्ताह बीत चुके हैं, तो उसकी गर्भावस्था की अवधि लगभग छह सप्ताह बताई जा सकती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि गर्भधारण को भी पूरे छह सप्ताह हो चुके हैं। सामान्य 28 दिन के माहवारी चक्र में अंडोत्सर्जन और गर्भधारण अक्सर माहवारी शुरू होने के लगभग दो सप्ताह बाद होते हैं। इसी वजह से गर्भावस्था की चिकित्सकीय आयु वास्तविक गर्भधारण के समय से आगे रहती है। हालांकि, सभी महिलाओं का माहवारी चक्र 28 दिनों का नहीं होता। किसी महिला का चक्र छोटा या लंबा हो सकता है और अंडोत्सर्जन का समय भी बदल सकता है। ऐसे मामलों में केवल माहवारी की तारीख से गर्भावस्था की अवधि का सटीक आकलन करना कठिन हो सकता है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक अल्ट्रासाउंड और अन्य चिकित्सकीय जानकारी की मदद से गर्भावस्था की अवधि का आकलन करते हैं।

अल्ट्रासाउंड में दिखने वाली अवधि का क्या मतलब है?

अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की शुरुआती अवधि का आकलन करने में मददगार जांच है। शुरुआती गर्भावस्था में भ्रूण के विकास और माप के आधार पर चिकित्सक गर्भावस्था की अनुमानित अवधि का आकलन कर सकते हैं। इस जानकारी की तुलना महिला की आखिरी माहवारी की तारीख से भी की जाती है। यदि माहवारी की तारीख स्पष्ट न हो, चक्र अनियमित हो या माहवारी की गणना और अल्ट्रासाउंड के आकलन में अंतर दिखाई दे, तो डॉक्टर उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के आधार पर आगे का निर्णय लेते हैं। इसलिए रिपोर्ट में गर्भावस्था की अवधि देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर से उसका अर्थ समझना जरूरी है। गर्भावस्था की अवधि का सही आकलन प्रसव की संभावित तारीख निर्धारित करने और गर्भ में बच्चे के विकास की निगरानी के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए गर्भावस्था की जांच के दौरान आखिरी माहवारी की तारीख सही-सही बताना उपयोगी रहता है।

गर्भावस्था की अवधि देखकर किसी पर संदेह करने की जरूरत नहीं

डॉ. गरिमा सिंह ने अपने वीडियो के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की कि शादी के बाद बीते समय और गर्भावस्था की चिकित्सकीय अवधि में अंतर होना सामान्य गणना प्रक्रिया का परिणाम हो सकता है। यदि शादी को एक महीना हुआ है, लेकिन जांच में गर्भावस्था छह सप्ताह की दिखाई दे रही है, तो केवल इस अंतर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। गर्भावस्था की अवधि की गणना आखिरी माहवारी के पहले दिन से होती है, इसलिए इसमें माहवारी के वे दिन भी शामिल रहते हैं, जब गर्भधारण नहीं हुआ था। यही कारण है कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में बताई जाने वाली अवधि वास्तविक गर्भधारण के बाद बीते समय से अधिक हो सकती है। ऐसे मामलों में महिला को दोष देने, उस पर सवाल उठाने या बिना चिकित्सकीय जानकारी के कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय गर्भावस्था की सही गणना को समझना चाहिए। यदि रिपोर्ट को लेकर कोई भ्रम हो, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे बेहतर तरीका है।