नई दिल्ली। देशभर में लाखों विद्यार्थी हर वर्ष राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सफलता का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ कहानियां केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि संघर्ष, जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन जाती हैं। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी मोहम्मद सुहेल की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है। आर्थिक तंगी के बीच परिवार का सहारा बनने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाया और साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने तीसरे प्रयास में NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।
मां का सपना बना सबसे बड़ी प्रेरणा
मोहम्मद सुहेल के अनुसार उनकी मां हमेशा चाहती थीं कि उनका बेटा डॉक्टर बने। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने बेटे का हौसला कभी टूटने नहीं दिया। यही सपना सुहेल के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बना और उन्होंने हर परिस्थिति में अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।
आर्थिक तंगी के कारण संभाली परिवार की जिम्मेदारी
मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुहेल के पिता ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। सीमित आय में पूरे परिवार का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। ऐसे में सुहेल ने पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी भी उठाई और स्वयं ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया।
वह दिनभर ई-रिक्शा चलाकर प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये तक की कमाई करते थे और इसी आय से परिवार की आर्थिक मदद करते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा।
पहले प्रयास में मिले सिर्फ 109 अंक
बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुहेल ने मेडिकल प्रवेश के लिए NEET परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में उन्हें 720 में से केवल 109 अंक मिले। यह परिणाम उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं था।
कम अंकों के कारण उन्हें सामाजिक आलोचना और तानों का भी सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और कठिन विषयों पर अधिक मेहनत करने का निर्णय लिया।
दिनभर काम, रातभर पढ़ाई का सिलसिला
सुहेल का मानना था कि सफलता केवल पढ़ाई के घंटों से नहीं बल्कि लक्ष्य पूरा करने की प्रतिबद्धता से मिलती है। इसलिए उन्होंने कभी समय की गणना नहीं की।
दिनभर ई-रिक्शा चलाने के बाद वह रात में पढ़ाई करते थे। उनके इस कठिन सफर में उनके भाई और परिवार ने भी पूरा सहयोग दिया। परिवार के त्याग और विश्वास ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
तीसरे प्रयास में मिली बड़ी सफलता
पहले प्रयास में निराशा मिलने के बाद भी सुहेल ने तैयारी जारी रखी। वर्ष 2025 में भी उन्होंने NEET परीक्षा दी, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और मजबूत किया और दोबारा परीक्षा दी।
इस बार उन्होंने 720 में से 609 अंक हासिल किए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें लगभग 11 हजार रैंक मिलने का अनुमान है। इस सफलता के बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दिहाड़ी भी जारी, MBBS की तैयारी भी
इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में अनियमितताओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। वहीं मोहम्मद सुहेल अपना पूरा ध्यान अपनी दिहाड़ी और आगे की पढ़ाई पर केंद्रित किए हुए हैं।
वह आज भी परिवार की आर्थिक मदद के लिए काम कर रहे हैं और साथ ही MBBS में प्रवेश की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनका मानना है कि वर्षों के संघर्ष के बाद अब उनकी मां का सपना साकार होने के करीब है।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
मोहम्मद सुहेल की सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां किसी भी लक्ष्य की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर मेहनत, परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास किसी भी बड़ी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बना सकते हैं।
